अजय दीक्षित
केंद्रीय सरकार और उप राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शेखर को लेकर उत्पन्न विवाद को लेकर 75 वर्षीय भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ विगत दिवस अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राजस्थान के झुंझनू जिले से आने वाले जगदीप धनकड़ का लंबा संसदीय जीवन रहा है।वे इस दौरान विधानसभा सदस्य, लोकसभा सदस्य, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री, पश्चिमी बंगाल के राज्यपाल, और 2022 से भारत के उपराष्ट्रपति पद आसीन थे। पेशे से वकील जगदीप धनकड़ ने जिला न्यायालय, राजस्थान हाइकोर्ट, और सर्वोच्च न्यायालय में वकालत भी की । उन्होंने अपनी राजनीति एक समाजवादी नेता के तौर पर लोकदल से की। जाट परिवार में जन्मे जगदीप धनकड़ किसान नेता थे।बाद में वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और तमाम संवैधानिक पदों पर रहे ।
जगदीप धनकड़ ने अपने त्यागपत्र में कहा कि वह अपने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ रहे हैं। लेकिन उनके त्यागपत्र ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब क्या कारण रहे कि उनको त्यागपत्र देना पड़ा है। लेकिन जब तक वे ही कुछ नहीं कहते तब तक तो स्वास्थ्य ही कारण माना जाएगा।हालांकि 21 जुलाई शाम छह बजे तक उन्होंने सांसदों के साथ मीटिंग की है और उसके बाद अचानक त्याग पत्र लिख राष्ट्रपति से मिले और घर चले गए। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरण जिजउ, केंदीय मंत्री पहलाद जोशी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनसे मुलाकात की। लेकिन कोई सार्थक संकेत निकल कर नहीं आया बताया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संपर्क किया है।
बताया जाता है कोई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग थी जिसमें जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरण जिजउ को जाना था और वे गए नहीं । लेकिन इतना भर उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा का कारण नहीं हो सकता कोई भीतर खाने की बात है जो कल चिंगारी बनी ।
सरल और विनोदी स्वभाव के जगदीप धनकड़ ने पहले पश्चिमी बंगाल में ममता बनर्जी से लोहा लिया और तीन साल से राज्यसभा में कांग्रेस से लोहा ले रहे थे।अभी बीच में तो कांग्रेस ने उन्हें हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव भी दे दिया था हालांकि उससे ने हटते नहीं लेकिन कड़वाहट न आए इस लिए उन्होंने खुद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से बातचीत की । हां जस्टिस वर्मा से बहुत नाराज थे क्योंकि उनके घर जले हुए नोट मिले थे। जगदीप धनकड़ ने सर्वोच्च न्यायालय से प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा कि उन्हें त्यागपत्र नहीं देना चाहिए।
जगदीप धनकड़ के इस्तीफे कोई विशेष कारण है क्योंकि उन्होंने अभी जस्टिस वर्मा से संबंधित महाभियोग प्रस्तावों का परीक्षण हेतु कमेटियों का गठन किया था जिससे राज्यसभा कुछ अधिकारियों को भी शामिल किया था जिसमें पक्ष के लोगों को आपत्ति थी।शायद मल्लिकार्जुन खड़गे ने बकायदा पत्र भी लिखा था।
सूत्रों के मुताबिक किसान आंदोलन में कुछ मांगो का जवाब भी वे कृषि मंत्री शिवराज सिंह से चाहते थे। लेकिन यह सब कयास ही हैं अलबत्ता उनके द्वारा लिखित स्वास्थ्य कारणों को ही जगदीप धनकड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा के प्रमुख कारण माना जा सकता है।
( लेख में व्यक्त विचार निजी हैं)

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