सेबी को क्रिप्टो एसेट ईटीएफ की अनुमति क्यों देनी चाहिए: नवाचार और निवेशक सुरक्षा का मामला

नई दिल्ली , 01 अप्रैल (आरएनएस)। कल्पना कीजिए कि आप बिटकॉइन से संपत्ति बना रहे हैं, वह भी बिना उसे सीधे अपने पास रखे और बिना हैकिंग या कस्टडी की चिंता किए। यही सुविधा क्रिप्टो एसेट एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) प्रदान करते हैं। ये ईटीएफ बिटकॉइन, एथेरियम और अन्य डिजिटल एसेट बास्केट को ट्रैक करते हैं और प्रतिष्ठित स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेड होते हैं। इसका मतलब है कि निवेशकों को एक सुरक्षित, पारदर्शी और तरल निवेश विकल्प मिलता है, जहां उन्हें डिजिटल संपत्तियों तक पहुंच तो मिलती है, लेकिन बिना किसी तकनीकी या सुरक्षा जोखिम के। भारत में ईटीएफ की शुरुआत 2002 में हुई थी, और 2021 तक इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) ?3.16 लाख करोड़ तक पहुंच चुका था। वहीं, वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो ईटीएफ ने और भी तेज़ी से सफलता हासिल की है, और जनवरी 2024 में मंजूरी मिलने के बाद से बिटकॉइन ईटीएफ ने ?8.6 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति जुटा ली है। क्रिप्टो ईटीएफ ने दुनिया भर में निवेशकों को डिजिटल संपत्तियों तक पहुँचने का एक नया तरीका दिया है। अमेरिकी एसईसी ने जनवरी 2024 में 11 स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ को मंजूरी दी है। वहीं ब्लैकरॉक का आईशेयर्स बिटकॉइन ट्रस्ट बहुत कम समय में उसके अपने गोल्ड ईटीएफ से आगे निकल गया है। यूरोप और कनाडा में भी क्रिप्टो ईटीएफ को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। पीडब्ल्यूसी- एआईएमए  की रिपोर्ट के अनुसार, 47त्न पारंपरिक हेज फंड अब डिजिटल संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं। इसी के साथ एचएसबीसी, गोल्डमैन सैक्स और ब्लैकरॉक जैसी प्रमुख वित्तीय कंपनियां भी क्रिप्टो कस्टडी और ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही हैं। अब यह भारत पर निर्भर करता है कि वह अपने निवेशकों को इस अवसर से वंचित रखना चाहता है या सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में क्रिप्टो नवाचार को अपनाकर आगे बढऩा चाहता है। अगर भारत ने अभी कदम नहीं उठाया, तो यह सिर्फ एक वित्तीय अवसर ही नहीं, बल्कि डिजिटल युग की एक बड़ी क्रांति को भी खो देगा।

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