भवाली, उत्तराखंड: किशोर न्याय समिति, उच्च न्यायालय उत्तराखंड और महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में उत्तराखंड न्यायिक एवं विधिक अकादमी (उजाला) भवाली में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका मुख्य विषय “बालिका सुरक्षा: भारत में उसके लिए एक सुरक्षित और सशक्त वातावरण की ओर” था। इस आयोजन का उद्देश्य बालिकाओं के खिलाफ हिंसा, बाल विवाह और तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों पर गहन चर्चा कर भविष्य के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना था।
कार्यशाला का उद्घाटन उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुहानाथन नरेंदर और अन्य न्यायाधीशों – रवीन्द्र मैथानी, आलोक कुमार वर्मा, राकेश थपलियाल, आलोक माहरा और सुभाष उपाध्याय ने दीप प्रज्वलित कर किया।
मुख्य न्यायाधीश गुहानाथन नरेंदर ने अपने संबोधन में प्रतिभागियों को महान तमिल कवि सुब्रह्मण्यम भारती की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए बालिकाओं से निर्भीक और आत्मविश्वासी बनने का आह्वान किया। वहीं, न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैथानी ने इस बात पर चिंता जताई कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी हमें बालिकाओं के विरुद्ध हिंसा पर मंथन करने की आवश्यकता पड़ रही है। उन्होंने सभी हितधारकों से लगन और प्रतिबद्धता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आग्रह किया।
किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने अपने मुख्य भाषण में पीसीपीएनडीटी एक्ट और एमटीपी एक्ट जैसे कानूनों के दुरुपयोग पर प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने पॉक्सो एक्ट के तहत ‘स्टेटमेंट रिकॉर्डिंग’ पर भी विशेष चर्चा की। कार्यशाला में उजाला द्वारा तैयार की गई ‘जनरल रूल्स (क्रिमिनल)’ और किशोर न्याय समिति द्वारा तैयार ‘पॉक्सो एक्ट 2012 पर सूचना पत्र’ का भी विमोचन किया गया, जो बालिकाओं से जुड़े कानूनी मामलों में सहायक होगा।
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में न्यायिक अधिकारियों के अलावा महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण और पंचायती राज विभागों के पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, जिनमें चंद्रेश यादव, डॉ. रश्मि पंत, एसपी निहारिका तोमर और राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा कुसुम कंडवाल शामिल थीं, ने अपने विचार साझा किए और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए व्यावहारिक समाधानों पर जोर दिया।
समापन भाषण में न्यायमूर्ति आलोक माहरा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए यह उम्मीद जताई कि इस कार्यशाला से निकले निष्कर्षों और उपलब्धियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा, ताकि वास्तव में बालिकाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण बन सके।
बालिका सुरक्षा पर उत्तराखंड में कार्यशाला, न्यायपालिका और सरकार के बीच बनी रणनीति
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