

फिरोजाबाद। रक्षा मंत्रालय के अधीन हजरतपुर स्थित आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफ) में करीब 12 करोड़ रुपये के फर्जी टेंडर घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में चार मुकदमे दर्ज कर पूर्व मुख्य महाप्रबंधक अमित सिंह समेत 10 से अधिक अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
सीबीआई की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि वर्ष 2022 से 2025 के दौरान फैक्ट्री में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए फर्जी टेंडर बांटे गए। चहेती कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए फैक्ट्री के अंदर के कंप्यूटरों का इस्तेमाल किया गया, फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र, बनावटी कोटेशन और गलत दस्तावेज तैयार किए गए तथा योग्यता शर्तों को मनमाने ढंग से बदला गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, एमएसएम एंटरप्राइजेज को करीब 5.67 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए। इनमें सिविल वर्क्स, जीईएम खरीद, लोकल खरीद और नकद खरीद शामिल हैं। अमित सिंह के निर्देश पर 2023-24 में सिविल वर्क टेंडर की पात्रता शर्तों को बदल दिया गया, जिससे कंपनी अयोग्य होने के बावजूद काम हासिल कर सकी। बाद में शर्तें बहाल कर दी गईं, लेकिन तब तक कंपनी को पर्याप्त लाभ मिल चुका था। आईपी एड्रेस जांच में पुष्टि हुई कि कंपनी ने फैक्ट्री के कंप्यूटर से ही बिड जमा की थी।
जूनियर वर्क्स मैनेजर दीपेश गुप्ता और मनोज कुमार को रिश्वत दी गई। दीपेश गुप्ता को करीब 38 लाख रुपये जबकि मनोज कुमार को 21 लाख रुपये से अधिक की राशि विभिन्न लेन-देन के माध्यम से पहुंचाई गई। अमित सिंह और उनकी पत्नी के दक्षिण कोरिया यात्रा के हवाई टिकट भी इन्हीं कंपनियों से जुड़े पैसे से बुक कराए गए।
इसी प्रकार आयुष एंटरप्राइजेज और अर्बन वॉल को 29 लोकल खरीद टेंडर फर्जी कोटेशन देकर दिलाए गए। इन दोनों फर्मों को अजित गौतम परिवार के सदस्यों के नाम पर संचालित करने का आरोप है। दीपेश गुप्ता को इन कंपनियों से 3.77 लाख रुपये मिले और बदले में वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए गए।
एमके इंडस्ट्रीज (बाद में एमके हाईटेक प्राइवेट लिमिटेड) को 5.26 करोड़ रुपये के 17 ठेके दिए गए, जबकि कंपनी के पास न तो जरूरी अनुभव था और न ही तकनीकी योग्यता। फरीदाबाद स्थित कंपनी के पते पर जांच में कोई व्यवसायिक गतिविधि नहीं मिली। एक ठेके में डफल ट्रॉली बैग की खरीद में मात्रा बढ़ाकर मनमानी की गई। खरीदे गए 5000 बैगों में से केवल 1072 ही जारी हुए, बाकी हजारों बैग दो साल से पड़े हुए हैं। कंपनी से अमित सिंह की पत्नी कंचन सिंह के खाते में 3.40 लाख रुपये ट्रांसफर होने का भी मामला सामने आया है।
इसके अलावा, फैक्ट्री के पास अवैध निर्माण की अनुमति देने के बदले 30 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप भी अमित सिंह, फैक्ट्री टेलर रघुनंदन शर्मा और राज कुमार मित्तल पर लगा है। मित्तल ने फैक्ट्री से मात्र 20 फीट की दूरी पर 289 मीटर लंबी और 18 फीट ऊंची दीवार बनवाई, जो सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।
अमित सिंह पर पहले ही 26 फरवरी 2026 को संपत्ति के असंगत स्रोत का अलग मुकदमा दर्ज किया जा चुका है, जिसमें उनके कार्यकाल में 55.58 लाख रुपये की अतिरिक्त संपत्ति पाई गई थी।
सीबीआई ने आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं। जांच जारी है और मामले में और लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। यह घोटाला रक्षा उत्पादन इकाइयों में टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है।
आयुध उपस्कर निर्माणी हजरतपुर (OEF Hazratpur) Troop Comforts Limited की यूनिट है। यहां सैन्य उपकरण, बैग, वस्त्र आदि बनाए जाते हैं। घोटाले के अलावा यहां सुरक्षा संबंधी विवाद भी पहले सामने आ चुके हैं – फरवरी 2025 में अनधिकृत विदेशी विजिट और ISI को क्लासिफाइड दस्तावेज लीक का मामला काफ़ी चर्चाओं में रहा है।

Recent Comments