16 जानें गईं, पर इंसाफ आज भी गुम है” – मृतकों के परिवारों का आक्रोश

एसटीपी त्रासदी पर न्याय की हुंकार : 5 अगस्त से धरना- पंकज क्षेत्री

देहरादून। 19 जुलाई 2023 को चमोली जनपद में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत बने एसटीपी प्लांट (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) पर हुए भीषण हादसे में 16 निर्दोष लोगों की करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई थी। यह हादसा उत्तराखंड के प्रशासनिक लापरवाहियों और निर्माण कार्यों में बरती गई गंभीर तकनीकी चूक का नतीजा था। दो वर्ष बीत जाने के बावजूद, आज भी मृतकों के परिजनों को न्याय नहीं मिल पाया है।

मुख्यमंत्री के ही पास है पेयजल मंत्रालय, फिर भी दो साल में नहीं मिला न्याय
इस हृदयविदारक दुर्घटना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार पेयजल विभाग ने मात्र ₹7 लाख मुआवज़ा देकर इतिश्री कर ली, जबकि उस समय सरकार की ओर से बड़े-बड़े वादे किए गए थे — कि मृतकों के परिवारों को उचित मुआवज़ा दिया जाएगा और एक सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी दी जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि वादे अधूरे हैं और परिजन आज भी दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

तीन परिवारजनों को खोया, पर एक भी न्याय नहीं मिला” — पीड़ित की व्यथा
पूर्व छात्र नेता और युवा इंटक के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट पंकज क्षेत्री ने इस संबंध में बेहद भावुक होकर कहा कि आज उनके पास चमोली से पीड़ित परिवार के सदस्य मिलने आए। एक शख्स ने इस हादसे में अपने परिवार के तीन लोगों को खोया, तो दूसरे ने दो लोगों को। इसके बावजूद सरकार का रवैया बेहद असंवेदनशील रहा। “क्या ₹7 लाख इंसान की जान की कीमत है? क्या यही है उत्तराखंड की सरकार की संवेदनशीलता?” — क्षेत्री ने सवाल खड़े किए।

05 अगस्त से शहीद स्मारक पर अनिश्चितकालीन धरना, न्याय के लिए हुंकार
एडवोकेट पंकज क्षेत्री ने ऐलान किया है कि अब समय आ गया है कि इस अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज़ उठाई जाए। वे स्वयं मृतकों के परिजनों के साथ 5 अगस्त 2025, सुबह 11 बजे से देहरादून के शहीद स्मारक पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।
क्षेत्री ने कहा, “जो 16 लोग मारे गए, वे कर्तव्यपरायण थे, सिस्टम की लापरवाही के कारण उन्होंने अपनी जान गंवाई — मैं उन्हें शहीद मानता हूं। इसलिए शहीद स्मारक से बेहतर कोई स्थान नहीं, जहां से इस लड़ाई को शुरू किया जाए।”

उत्तराखंडवासियों से अपील: न्याय की इस लड़ाई में आगे आएं
एडवोकेट पंकज क्षेत्री ने समस्त उत्तराखंडवासियों से अपील की है कि वे इस न्याय संग्राम में पीड़ित परिवारों का साथ दें। “अगर आज हम चुप रहे, तो कल ये लापरवाह सरकारें और ठेकेदार किसी और की जान लेंगे और इतिश्री कर देंगे ₹7 लाख में। हमें लड़ना होगा, आवाज़ उठानी होगी।”

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