देहरादून(आरएनएस)। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, चंडीगढ़ में पॉवर सेक्टर के निजीकरण को लेकर हुए फैसलों पर उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से विरोध जताया गया। शुक्रवार को यूजेवीएनएल मुख्यालय पर निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। यूजेवीएनएल मुख्यालय में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए संयोजक इंसारुल हक ने कहा कि जनता के पैसे से हजारों करोड़ का पॉवर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। अब मुनाफा कमाने को पॉवर सेक्टर को निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है। ऐसा कर कर्मचारियों के भविष्य को खतरे में डाला जा रहा है। निजीकरण से आम जनता, किसानों, उद्योगों पर महंगी बिजली का बोझ बढ़ेगा। जवाबदेही खत्म होगी। देश में अभी तक जहां भी पॉवर सेक्टर को निजी हाथों में दिया गया है, वहां जनता को परेशानी उठानी पड़ी है। सरकारों को घाटा उठाना पड़ा है। सह संयोजक राहुल चानना ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार तत्काल बिजली के निजीकरण के फैसले को वापस ले। आदेश को निरस्त करे। चंडीगढ़ में भी निजी कंपनी को बाहर कर निजीकरण को समाप्त किया जाए। राजस्थान में बिजली उत्पादन निगम को ज्वाइंटर वेंचर के नाम पर निजी हाथों में न दिया जाए। कहा कि उत्तराखंड में कभी भी ऐसा कोई प्रयास हुआ, तो बिना किसी पूर्व सूचना के तत्काल आंदोलन खड़ा कर दिया जाएगा। विरोध जताने वालों में राकेश शर्मा, विवेक राजपूत, राजीव चक्रवर्ती, रेखा डंगवाल, हिमांशु बडोनी, अर्चित भट्ट, अनुज राणा, आशीष कुमार, पंकज सैनी, बब्लू सिंह, विनोद कवि, सुनील तंवर आदि मौजूद रहे।

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