सही दिशा में बच्चों की पढ़ाई

 एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) 2024 मंगलवार को नयी दिल्ली में जारी हुई।  रिपोर्ट के अनुसार, छह से चौदह वर्ष के बच्चों के पढ़ने की क्षमता और गणितीय कौशल में कोरोना महामारी के बाद सुधार हुआ है।  इन सबमें सरकारी स्कूलों ने अच्छी भूमिका निभायी है।  सरकारी स्कूलों में तीसरी कक्षा के बच्चों के पढ़ने की बुनियादी क्षमता पहले से काफी बेहतर हुई है और यह 20 वर्ष के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी है।  अब तीसरी कक्षा के 23। 4 प्रतिशत बच्चे दूसरी कक्षा की पुस्तकें पढ़ सकते हैं, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 16। 3 प्रतिशत और कोरोना पूर्व काल में (2018 में) 20। 9 प्रतिशत था।
वहीं सरकारी और निजी दोनों ही स्कूलों के बच्चों के बुनियादी गणितीय कौशल में भी बेहतरी देखने को मिली है और यह एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी है।  अब कक्षा तीन के बच्चे कम से कम घटाव के प्रश्न हल कर सकते हैं।  वहीं कक्षा पांच के बच्चे भाग के प्रश्न को हल कर सकते हैं।  देशभर में सीखने के स्तर में भी तेजी से सुधार आया है।  सीखने का यह स्तर 2010 तक स्थिर रहा था और इसके बाद इसमें गिरावट आने लगी थी।
हालांकि 2014 से 2018 के बीच बच्चों की सीखने की क्षमता में थोड़ा सुधार देखने को मिला, पर कोरोना काल ने इन सब पर तुषारापात कर दिया।  स्कूलों के बंद होने और अधिकांश बच्चों के पास स्मार्टफोन न होने या घर में एक ही स्मार्टफोन होने, माता-पिता के अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे होने जैसे कारणों ने भी बच्चों के सीखने के बुनियादी कौशल को बुरी तरह प्रभावित किया।  बच्चों ने जो कुछ भी पहले पढ़ा-सीखा था, वे उसे भूल गये।  रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के स्कूलों व अन्य शैक्षणिक केंद्रों में नामांकन प्रतिशत में भी वृद्धि दर्ज हुई है।  डिजिटल साक्षरता की दर में भी बढ़ोतरी हुई है।
यह सुखद समाचार है कि छात्र कोरोना काल से उबर कर आगे बढ़ रहे हैं।  सरकारी स्कूलों में भी अब पढ़ाई को लेकर थोड़ी गंभीरता आयी है।  शिक्षक भी अपना काम पूरी मुस्तैदी से कर रहे हैं।  यह रिपोर्ट यह संकेत कर रही है कि बच्चे, विशेषकर उनके परिवार वालों को शिक्षा का महत्व समझ आ रहा है।  स्कूलों में बढ़ता नामांकन और नामांकन प्रतिशत का स्थिर रहना इसी ओर संकेत कर रहा है।  कुल मिलाकर, शिक्षा क्षेत्र से आया यह समाचार सुखद है और उम्मीदों से भरा है कि आखिरकार बच्चों की पढ़ाई सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

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