मनरेगा मजदूरी भुगतान में देरी पर कांग्रेस का सरकार पर हमला

लखनऊ 6 मार्च (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री नव्व अजय राय ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्र और राज्य सरकार पर मनरेगा मजदूरों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत 1 करोड़ 65 लाख से अधिक जॉब कार्ड धारक हैं, जिनमें से 1 करोड़ 9 लाख 33 हजार 396 सक्रिय जॉब कार्ड धारक हैं। लेकिन, केंद्र सरकार पिछले 9 दिसंबर 2024 से लगभग 1 करोड़ 10 लाख मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं कर रही है, जिससे उनकी बकाया राशि 99.75 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।श्री राय ने बताया कि मनरेगा अधिनियम के तहत मजदूरों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी मिलनी चाहिए, अन्यथा विलंब के लिए 0.05 प्रतिशत प्रतिदिन का हरजाना दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के कारण मजदूरों को बंधुआ श्रमिक बनने के लिए मजबूर किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि इस योजना को लागू करने वाले 40,000 संविदा कर्मी भी गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, जिन्हें औसतन 8 महीने से मानदेय नहीं मिला है। इतना ही नहीं, अप्रैल 2015 से इन कर्मियों को ईपीएफ का लाभ नहीं मिला है, जबकि यह उनका कानूनी अधिकार है। पिछले 8 वर्षों में 2,000 से अधिक संविदा कर्मियों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके परिवारों को किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिला।सबसे आपत्तिजनक पहलू यह है कि ईपीएफ में नियोक्ता के 13 प्रतिशत अंशदान को भी संविदा कर्मियों के मानदेय से काटा जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है। नव्व राय ने इसे भाजपा सरकार की संविदा कर्मियों के प्रति असंवेदनशील मानसिकता करार दिया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा लाई गई मनरेगा योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हुई थी, लेकिन भाजपा सरकार इसे पूरी तरह विफल कर रही है। कांग्रेस पार्टी इस योजना को बचाने के लिए सडक़ से लेकर विधानसभा और संसद तक संघर्ष करेगी।
होली और ईद के त्योहार को देखते हुए नव्व राय ने मांग की कि होली से पहले सभी 1 करोड़ 9 लाख जॉब कार्ड धारकों को उनकी मजदूरी और विलंब से हुए नुकसान की भरपाई समेत भुगतान किया जाए। साथ ही 40,000 संविदा कर्मियों को भी उनका बकाया मानदेय दिया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो और जिन कर्मियों की मृत्यु हो चुकी है, उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ दिया जाए।

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