नई दिल्ली, 27 मार्च 2025 (एजेंसिया )केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लोकसभा में पारित एक विधेयक को लेकर ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) ने कड़ा विरोध जताया है। सीटू ने इस कानून को पेंशनभोगियों के बीच भेदभावपूर्ण करार देते हुए इसे सरकारी कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताया है।
सीटू का कहना है कि वित्त विधेयक 2025 के तहत पारित यह नया कानून सरकार को यह अधिकार देता है कि वह वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में पेंशनभोगियों के साथ भेदभाव कर सके। यह सरकार द्वारा अपनाया गया एक अन्यायपूर्ण और भ्रामक कदम है, जो नवउदारवादी ताकतों के इशारे पर लागू किया जा रहा है।
कानून की प्रावधानों पर आपत्ति
सीटू ने कहा कि यह कानून पेंशनभोगियों को सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उनके साथ अन्याय करता है। खास बात यह है कि इस कानून को 1 जून 1972 से पूर्वव्यापी रूप से लागू किया गया है, जिससे हजारों पेंशनभोगी प्रभावित होंगे। यह सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972, 2021 और 2023 के तहत बनाए गए नियमों को भी प्रभावित करता है।
सीटू का आरोप है कि यह कानून गारंटीड ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS), न्यू पेंशन स्कीम (NPS) और हाल ही में लाई गई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत आने वाले सभी पेंशनभोगियों के अधिकारों को कमजोर करेगा। सरकार इस कानून को 1 अप्रैल 2025 से लागू करने की अधिसूचना जारी कर चुकी है।
मोदी सरकार पर निशाना
सीटू ने इस कानून को मोदी सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीति का हिस्सा बताया और कहा कि यह श्रमिकों और पेंशनभोगियों के हकों पर सीधा हमला है। यूनियन ने चेतावनी दी कि कर्मचारी और पेंशनभोगी पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे।
सीटू ने केंद्र सरकार से इस विधेयक को रद्द करने की मांग की है और पेंशनभोगियों के समर्थन में आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। यूनियन ने कहा कि यह लड़ाई कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ी जाएगी और किसी भी भेदभावपूर्ण नीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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