
चेतावनी के बावजूद न्यायिक कार्य करने पर करीब 40 अधिवक्ताओं की सदस्यता निलंबित
प्रयागराज,29 मार्च (आरएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं की हड़ताल फिलहाल स्थगित हो गई है। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आवास में भारी मात्रा में कैश मिलने के बाद कथित भ्रष्टाचार और कदाचार का आरोप लगाते हुए बार एसोसिएशन ने मंगलवार से हड़ताल की घोषणा कर दी थी। हाईकोर्ट के फोटो वेरिफिकेशन का कार्य भी बंद हो गया था। शुक्रवार को अनिल तिवारी और एल्डर्स कमेटी की अध्यक्ष टीपी सिंह की मौजूदगी में कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। इसके बाद सर्व सम्मति से हड़ताल को स्थगित करने और मंगलवार से हाईकोर्ट का कामकाज शुरू करने पर सहमति बनी। कहा कि वादकारियों को हो रही दिक्कत को देखते हुए फैसला लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
हाईकोर्ट के बाहर आकर अध्यक्ष अनिल तिवारी ने बैठक में हुए निर्णय की जानकारी दी और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा कैश कांड मामले में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद अगली रणनीति तय की जाएगी। वादकारियों को हो रही दिक्कत को देखते हुए बार एसोसिएशन ने कार्य बहिष्कार का अपना निर्णय वापस लिया है। अधिवक्ता जस्टिस वर्मा के शपथ ग्रहण का बहिष्कार करेंगे।
जस्टिस यशवंत वर्मा के प्रयागराज स्थानांतरण के विरोध समेत कई मांगों को लेकर चौथे दिन भी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की अगुवाई में अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। आमसभा में प्रस्ताव पारित कर बार के प्रस्ताव और चेतावनी को न मान न्यायालय में जाकर न्यायिक कार्य करने वाले करीब 40 अधिवक्ताओं की सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई। साथ ही उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी गया है। इस पर दो दिन में जवाब नहीं देने पर उनकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी।
वकीलों ने भाई-भतीजावाद, लिस्टिंग की बदहाल व्यवस्था व फ्रेश मुकदमों की लंबे समय तक सुनवाई न होने पर चिंता जताई। मांग की कि जस्टिस यशवंत वर्मा के स्थानांतरण व इलाहाबाद हाईकोर्ट में कार्यरत जजों के परिजनों की यहां प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाए।

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