उत्तराखंड में ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में बाहरी राज्यों का वर्चस्व: स्थानीय युवाओं के साथ घोर अन्याय ?

देहरादून, 01अप्रैल 2025(आरएनएस )भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा 2025 के लिए ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस भर्ती में कुल 21,413 पदों पर नियुक्ति की जानी है, जिनमें से उत्तराखंड राज्य के लिए 1,238 पद स्वीकृत किए गए हैं। चयन प्रक्रिया पूरी तरह से 10वीं कक्षा के अंकों पर आधारित है, जिसमें किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा या साक्षात्कार नहीं होता।

भर्ती प्रक्रिया और चयन मानदंड

इस भर्ती के तहत चयन पूरी तरह से मेरिट पर आधारित होता है। इसके लिए निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं:

  1. 10वीं कक्षा के अंकों के आधार पर प्रारंभिक मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है।
  2. शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन (DV) किया जाता है।
  3. अंतिम चयन से पहले एक मेडिकल परीक्षा आयोजित की जाती है।

हालांकि, इस साल उत्तराखंड में हुई इस भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की खबरें सामने आई हैं।

उत्तराखंड के युवाओं के साथ अन्याय?

उत्तराखंड में ग्रामीण डाक सेवक के 1,238 पदों पर बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों का चयन किया गया है। इसका कारण बाहर के अभ्यर्थियों के 100% मार्क्स होने के कारण है। सूत्रों के अनुसार, इस कारण से इस बार भी स्थानीय युवाओं को चयन प्रक्रिया में पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। उत्तराखंड के युवाओं का आरोप है कि राज्य में अन्य राज्यों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई, जिससे वे मेरिट लिस्ट से बाहर हो गए।

हिंदी नहीं जानने वाले अभ्यर्थी भी हुए चयनित

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई ऐसे उम्मीदवारों का चयन किया गया है जिन्हें हिंदी लिखनी तक नहीं आती। जांच के दौरान पता चला कि हरियाणा, पंजाब, और अन्य राज्यों के कई अभ्यर्थियों को हिंदी में A++ ग्रेड मिला था, जबकि वे हिंदी के सामान्य शब्द भी नहीं लिख सकते।

उत्तराखंड डाक विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई जांच में अब तक ऐसे छह अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय का कारण

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य कुछ राज्यों के शिक्षा बोर्ड अपने विद्यार्थियों को हाई स्कूल परीक्षाओं में खुले हाथों से अंक प्रदान करते हैं, जबकि उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड में अंकों की ऐसी मनमानी नहीं होती। इसी वजह से उत्तराखंड के युवाओं के अंक कम होते हैं और वे मेरिट लिस्ट में जगह नहीं बना पाते।

भर्ती घोटाले की जांच और भविष्य की राह

उत्तराखंड डाक विभाग के निदेशक अनसूया प्रसाद चमोला ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार गलत तरीके से चयनित हुआ है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक जांच में चमोली और अल्मोड़ा जिलों के छह अभ्यर्थियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

राज्य सरकार को करना चाहिए हस्तक्षेप

ग्रामीण डाक सेवक पदों की पहली मेरिट लिस्ट जारी की जा चुकी है और 07 अप्रैल 2025 से चयनित अभ्यर्थियों को सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया प्रारम्भ होने जा रही है, जिससे राज्य के आवेदकों में घोर निराशा है।
उत्तराखंड सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि जिस प्रकार से इंजीनियरिंग कॉलेजों व अन्य शाखाओं में प्रवेश हेतु राज्य का कोटा 85% नियत है और बाहर के राज्यों के लिए 15% कोटा तय है, उसी तर्ज पर ग्रामीण डाक सेवक पदों पर भर्ती हेतु केंद्र सरकार से राज्य कोटा निर्धारित करने की मांग की जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में भी अन्य राज्यों के उम्मीदवार ही उत्तराखंड के सरकारी नौकरियों पर काबिज होते रहेंगे और राज्य के युवा रोजगार से वंचित रह जाएंगे।

कानूनी पहलू एवं सरकार की जिम्मेदारी

संवैधानिक रूप से, राज्य सरकार को अपने स्थानीय युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16(3) के तहत संसद को यह अधिकार प्राप्त है कि वह कुछ नौकरियों के लिए निवास संबंधी प्रतिबंध लगा सके। इसी तरह, अनुच्छेद 371 के तहत कुछ राज्यों को विशेष अधिकार भी दिए गए हैं। उत्तराखंड सरकार केंद्र से अनुरोध कर सकती है कि इस भर्ती में राज्य को विशेष प्राथमिकता दी जाए।

इसके अलावा, उत्तराखंड सरकार अनुच्छेद 15(4) और 15(5) के तहत विशेष प्रावधान लाकर अपने स्थानीय छात्रों के हितों की रक्षा कर सकती है, जैसा कि अन्य राज्यों में किया गया है।

यह मामला उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए सरकारी नौकरी प्राप्त करना और भी कठिन हो जाएगा। स्थानीय युवाओं को उनका हक दिलाने के लिए राज्य सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए और इस भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके लिए, या तो राज्य कोटा लागू किया जाए या फिर बाहरी राज्यों के फर्जी अंकों की जांच कर निष्पक्ष चयन प्रक्रिया अपनाई जाए।

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