दक्षिण सूडान : गहराते संकट के बीच, सभी पक्षों से शान्ति बनाए रखने की अपील

दक्षिण सूडान ,31 मार्च। दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन ने देश में बढ़ती हिंसा और प्रथम उप राष्ट्रपति रिएक मचार को हिरासत में लिए जाने की ख़बरों के बीच सभी पक्षों से संयम बरतने और शान्ति समझौते को बनाए रखने की अपील की है. यूएन मिशन ने कहा है कि टकराव को तुरन्त टालना होगा और दक्षिण सूडान के लोगों की भलाई के लिए बातचीत फिर शुरू की जानी होगी. हृरूढ्ढस्स् प्रमुख निकोलस हेसम ने बुधवार देर रात जारी एक बयान में कहा कि दक्षिण सूडान के नेता बड़े पैमाने पर हिंसक टकराव की ओर वापिस लौटने या फिर उसे 2018 में हुए समझौते की भावना के अनुरूप उसे शान्ति, पुनर्बहाली और लोकतंत्र की दिशा में आगे ले जाने के कगार पर खड़े हैं.निकोलस हेसम, दक्षिण सूडान के लिए यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि भी हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि इस समझौते में किया गया कोई भी एकतरफा संशोधन पिछले सात सालों में हुई प्रगति को उलट सकता है और इसमें दक्षिण सूडान को फिर से युद्ध में धकेले जाने का जोखिम भी है. उन्होंने कहा, इससे न केवल दक्षिण सूडान तबाह हो जाएगा, बल्कि पूरा क्षेत्र प्रभावित होगा.दक्षिण सूडान ने वर्ष 2011 में सूडान से स्वाधीनता हासिल की थी, मगर उसके बाद से यह टकराव और अस्थिरता से जूझता रहा है.वर्ष 2013 में राष्ट्रपति सल्वा कीर के वफ़ादार सैन्य बलों और पूर्व उप राष्ट्रपति रिएक मचार के समर्थकों में गृहयुद्ध भडक़ उठा था. कई वर्षों तक जातीय हिंसा, सामूहिक अत्याचार और मानवीय संकट जारी रहने के बाद 2018 में नाज़ुक हालात में एक शान्ति समझौते पर सहमति हुई.रिएक मचार ने साल 2020 से एक गठबन्धन में बतौर प्रथम उपराष्ट्रपति के रूप में कार्यभार सम्भाला है.शान्ति समझौते से कुछ हद तक स्थिरता आई, लेकिन इसके कार्यान्वयन में देरी और निरन्तर राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता की वजह से तनाव बरकऱार है.तेज़ हुई झड़पेंपिछले 24 घन्टों में लड़ाई में तेज़ी आई है, जिसमें दक्षिण सूडान के सरकारी सैन्य बलों और विपक्षी लड़ाकों के बीच राजधानी जूबा के नज़दीकी इलाक़ों से झड़पें होने की ताज़ा ख़बरें आई हैं. अपर नाइल क्षेत्र में भी स्थिति अस्थिर बनी हुई है. कुछ ही दिन पहले, युवाओं के एक मिलिशिया, तथाकथित व्हाईट आर्मी ने दक्षिण सूडान की सेना के बैरकों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था, जिसके जवाब में, सरकारी बलों ने नागरिक इलाक़ों पर बैरल बमों से बमबारी की है जिसमें ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल किया गया.बच्चों और हिंसक टकराव पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने भी चेतावनी दी कि लड़ाई के कारण बच्चों के जीवन पर जोखिम है और उनके यौन हिंसा का शिकार होने, सैनिकों के तौर पर भर्ती किए जाने समेत अधिकारों के उल्लंघन होने की आशंका है.उन्होंने कहा, मैं बढ़ती हिंसा, विशेष रूप से अपर नाइल प्रान्त में, से बहुत चिन्तित हूँ और सभी पक्षों से अपने हथियारों को त्यागने और अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी व मानवाधिकार कानून के तहत अपने दायित्वों के निर्वहन का आग्रह करती हूँ.हृरूढ्ढस्स् प्रमुख निकोलस हेसम ने बीते सप्ताह भी चेतावनी दी थी कि दक्षिण सूडान गृहयुद्ध के कगार पर ह. आम नागरिकों पर ताबड़तोड़ हमले हुए हैं, वे जबरन विस्थापन का शिकार हुए हैं और वहाँ जातीय तनाव की स्थिति बनी हुई है. उन्होंने आगाह किया कि हिंसा न केवल दक्षिण सूडान बल्कि पूरे क्षेत्र को तबाह कर देगी, जो एक और युद्ध बर्दाश्त नहीं कर सकता है.दक्षिण सूडान में फि़लहाल गम्भीर मानवीय स्थिति है, जहाँ 90 लाख से अधिक लोगों को मानवीय सहायता और सुरक्षा की आवश्यकता है. इनमें 20 लाख आन्तरिक रूप से विस्थापित भी हैं.

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