देहरादून में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ छात्रसंघ का जोरदार प्रदर्शन, मुख्य शिक्षाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

देहरादून, 2 अप्रैल 2025 – डीएवी पीजी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल के नेतृत्व में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने आज देहरादून के मुख्य शिक्षाधिकारी कार्यालय में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने निजी स्कूलों द्वारा हर साल बढ़ाई जा रही फीस, नए सत्र में दोबारा ली जा रही एडमिशन फीस और सिलेबस के नाम पर अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
छात्रसंघ अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि निजी स्कूल शिक्षा के नाम पर धंधा चला रहे हैं और अभिभावकों का जमकर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर साल मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने से गरीब और मध्यम वर्ग के अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्कूल हर साल सिलेबस बदलकर अभिभावकों से किताबों के नाम पर भी लूट-खसोट करते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य शिक्षाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने निजी स्कूलों की मनमानी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन में उन्होंने निम्नलिखित मांगे रखीं:

  • निजी स्कूलों द्वारा इस वर्ष फीस में कोई बढ़ोत्तरी न की जाए।
  • नए सत्र में अभिभावकों से एडमिशन फीस दोबारा न ली जाए।
  • हर साल सिलेबस बदलने के नाम पर अभिभावकों से किताबों के नाम पर लूट-खसोट बंद हो।
  • श्री गुरु राम राय सहित सभी निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग के नियमों के दायरे में लाया जाए।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई हो।
    सिद्धार्थ अग्रवाल ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्रसंघ अभिभावकों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि वे निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और अभिभावकों को न्याय दिलाकर रहेंगे।
    प्रदर्शन में एनएसयूआई कार्यकर्ता सौरभ सेमवाल, स्वयं रावत, आकाश अवस्थी, मंथन भाटिया सहित कई अन्य छात्र भी शामिल थे। उन्होंने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई और अभिभावकों को न्याय दिलाने का संकल्प लिया।
    इस प्रदर्शन ने देहरादून में निजी स्कूलों की मनमानी के मुद्दे को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और अभिभावकों को कब तक न्याय मिलता है।
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