चीन की ”एक बच्चा नीति’ आशीर्वाद से अभिशाप तक

बीजिंग, 05अप्रैल 2025 : चीन की ‘एक बच्चा नीति’ दुनिया की सबसे चर्चित जनसंख्या नियंत्रण योजनाओं में से एक रही है। लेकिन इसका सफर आसान नहीं था।  1970 के दशक की शुरुआत में चीन ने “लेटेर, लॉन्गर, एंड फ्यूअर” (Later, Longer, and Fewer) अभियान चलाया। इसका मतलब था लोग शादी देर से करें,  
  बच्चों के बीच लंबा अंतर रखें और कम बच्चे पैदा करें। इस नीति का मकसद तेजी से बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना था।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA)  कीजानकारी मुताबिक  इस नीति से जन्मदर में काफी गिरावट आई। 1979 में चीन ने ‘एक बच्चा नीति’ लागू की। सरकार ने सख्त नियम बनाए कि अधिकतर परिवार केवल एक ही बच्चा पैदा करें। ऐसा न करने पर भारी जुर्माना, नौकरी में दिक्कतें और सामाजिक दबाव झेलना पड़ता था।हार्वर्ड और बर्कले यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार इस नीति के प्रभाव से  जनसंख्या की वृद्धि दर घटी।  लेकिन कई नकारात्मक असर भी हुए जैसे लड़कों की संख्या में लड़कियों के मुकाबले असंतुलन, बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और युवा कामगारों की कमी।   कई परिवारों ने सामाजिक दबाव में लड़कियों का गर्भपात तक कराया।  
 


चीन की सरकार के आधिकारिक आंकड़े (National Bureau of Statistics of China) 2015 में चीन ने ‘एक बच्चा नीति’ को खत्म कर दिया और ‘दो बच्चे’ (Two-Child Policy) रखने की इजाजत दे दी। 2021 में चीन ने इसे बढ़ाकर ‘तीन बच्चे’ (Three-Child Policy) कर दिया। इसके बावजूद जन्मदर में तेजी से बढ़ोतरी नहीं हो रही है।विशेषज्ञ मानते हैं कि ‘एक बच्चा नीति’ ने चीन के सामाजिक ढांचे पर गहरा असर डाला, जो अब तक दिख रहा है।

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