पहले भाऊवाला अब सेलाकुई शराब ठेके पर ओवररेटिंग जारी…….

प्रशासन की आंखों में धूल झोंकते ठेकेदार, जनता हो रही है लूट का शिकार

देहरादून ।उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शराब दुकानों पर ओवररेटिंग की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला सेलाकुई के अंग्रेजी शराब ठेके से सामने आया है, जहां एक ग्राहक से बियर और व्हिस्की की बोतलों पर ₹40 की अवैध वसूली की गई।

ग्राहक ने 180 रुपये की एक बियर और 150 रुपये की एक पव्वा व्हिस्की के एवज में कुल ₹370 का डिजिटल भुगतान किया, जबकि वास्तविक कीमत ₹330 थी। उसने अपनी ओर से यूपीआई रसीद और उत्पाद की बोतलों की तस्वीरें भी हमारी चौपाल संवाददाता को भेजीं, जो इस गोरखधंधे का पुख्ता प्रमाण हैं।

प्रशासन ने नहीं ली भाऊवाला ठेके की पहले की चेतावनी से सीख
गौरतलब है कि 30 जुलाई को देहरादून के भाऊवाला ठेके पर ओवररेटिंग की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी, जिसमें ब्रीज़र की एक बोतल पर ₹10 अतिरिक्त वसूला गया था और कुल ₹70 की लूट की गई थी। उस समय भी शिकायत पुख्ता सबूतों के साथ थी, लेकिन प्रशासन और आबकारी विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

अब एक और नया मामला सामने आ चुका है, जिससे यह साफ होता है कि ना तो पुराने अधिकारियों की छुट्टी से कुछ बदला, ना ही नए अधिकारियों की नियुक्ति से कोई सुधार आया।

सवालों के घेरे में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली
इस पूरे घटनाक्रम में जिला आबकारी विभाग की निष्क्रियता सवालों के घेरे में है। सरकार द्वारा पूर्व जिला आबकारी अधिकारी को हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया, लेकिन नए अधिकारी भी ओवररेटिंग पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
क्या यह लापरवाही है, या फिर सुनियोजित चुप्पी? क्या ठेकेदारों को भीतर ही भीतर कोई प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?

जीरो टॉलरेंस” पर उठे गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा बार-बार मंचों से भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति की बात की जाती है, परंतु ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर नजर आती है। हर सप्ताह एक नया ठेका, एक नई ओवररेटिंग, एक नया पीड़ित – लेकिन कार्रवाई शून्य।

जनता का सवाल – लूट कब रुकेगी?
ग्राहकों को अब यह जानने का अधिकार है कि जब सबूत सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किए जा रहे हैं, तो प्रशासनिक अमला आखिर चुप क्यों है? क्या शराब की दुकानों पर ग्राहकों की जेब काटना अब ‘नियमित प्रक्रिया’ बन चुकी है?

सरकार और विभाग यदि अब भी नहीं जागे, तो स्पष्ट है कि यह गठजोड़ “फेविकोल के जोड़” से भी मजबूत है – जिसे तोड़ने के लिए केवल औपचारिक आदेश नहीं, बल्कि इरादों की ईमानदारी चाहिए।

हमारी जनता से अपील करता है कि यदि आप भी किसी शराब की दुकान पर ओवररेटिंग का शिकार हुए हैं, तो प्रमाण सहित शिकायत भेजें – हम आपकी आवाज़ बनेंगे।

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