“देहरादून घाटी को विनाश की ओर ले जा रही है उत्तराखंड सरकार की नीति : सूर्यकांत धस्माना”

एनजीटी ने केंद्र, प्रदूषण बोर्ड और मुख्य सचिव को भेजा नोटिस, 19 सितंबर को तलब | पर्यावरण संरक्षण के नाम पर खेला जा रहा है बड़ा खेल

देहरादून। उत्तराखंड सरकार द्वारा देहरादून घाटी के लिए केंद्र सरकार से करवाई गई नई अधिसूचना को लेकर बड़ा राजनीतिक व पर्यावरणीय विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन व देवभूमि मानव संसाधन विकास समिति एवं ट्रस्ट के अध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने आरोप लगाया है कि केंद्र के माध्यम से दून वैली नोटिफिकेशन 1989 को चुपचाप रद्द करवाकर उत्तराखंड सरकार ने देहरादून की जीवनदायिनी पारिस्थितिकी को रेड और ऑरेंज कैटेगरी के प्रदूषणकारी उद्योगों के हवाले कर दिया है।

धस्माना ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि केंद्र सरकार ने 13 मई 2025 को एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके अनुसार अब रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को देहरादून घाटी में लगाने के लिए केंद्र की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। यह निर्णय पूरी तरह राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ दिया गया है।

धस्माना ने अधिसूचना को बताया विनाशकारी

धस्माना ने इस नई अधिसूचना को विनाशकारी करार देते हुए बताया कि इस निर्णय के खिलाफ देवभूमि मानव संसाधन विकास समिति एवं ट्रस्ट ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में रिट दाखिल की है, जिसे एनजीटी ने स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। इन सभी को 19 सितंबर को उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस संशोधन के लिए केंद्र के समक्ष झूठे और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए, ताकि “ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी” की तर्ज पर पुराने पर्यावरणीय सुरक्षा कवच को ही खत्म किया जा सके।

देहरादून का अस्तित्व खतरे में
धस्माना ने चेतावनी दी कि जिस तरह राज्य में अंधाधुंध खनन, बेतरतीब भू-उपयोग परिवर्तन, पेड़ों की कटाई और अवैज्ञानिक निर्माण हो रहा है, उससे देहरादून की नाजुक पारिस्थितिकी संकट में है। उन्होंने कहा कि दून घाटी को 1989 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर विशेष दर्जा मिला था और उसी के तहत केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी की थी, ताकि देहरादून को अंधाधुंध औद्योगिकीकरण से बचाया जा सके।
उन्होंने यह भी बताया कि देहरादून पहले ही भूकंपीय क्षेत्र 4 व 5 में आता है, और इस घाटी की पारिस्थितिकी यदि नष्ट हो गई तो भविष्य की पीढ़ियां कभी माफ नहीं करेंगी।

राजनीतिक व सामाजिक आंदोलन की चेतावनी
सूर्यकांत धस्माना ने स्पष्ट किया कि यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं होगी, बल्कि इसे एक राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप भी दिया जाएगा। उन्होंने सभी जागरूक नागरिकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया।

पत्रकार वार्ता में मौजूद प्रमुख लोग:
इस अवसर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा के मीडिया सलाहकार सरदार अमरजीत सिंह, श्रम विभाग अध्यक्ष दिनेश कौशल, प्रदेश प्रवक्ता गिरिराज किशोर हिंदवाण, अधिवक्ता वेदांत बिजलवान और अधिवक्ता अभिषेक दरमोड़ा भी उपस्थित रहे।

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