उत्तरकाशी, 22 अगस्त। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी के बाद अब यमुना नदी पर भी एक कृत्रिम झील बन गई है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ आ गई है। यह घटना स्यानाचट्टी कस्बे के पास हुई, जहां कुपड़ागाड़ नाले से अचानक आए मलबे और बाढ़ के कारण यमुना का प्रवाह अवरुद्ध हो गया।
इस घटना के बाद गुरुवार को स्यानाचट्टी के सभी निचले इलाकों को खाली करा लिया गया। पुलिस ने बताया कि लगभग 150 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और राहत कार्य जारी है। हालांकि, इस आकस्मिक बाढ़ में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन कई होटल, घर और एक पुल पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं।
राहत और बचाव कार्य जारी
स्थिति पर कड़ी नजर रखने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), पुलिस, अग्निशमन सेवा, सिंचाई और राजस्व विभाग की टीमें मौके पर मौजूद हैं। इसके अलावा बड़कोट के उप-मंडल मजिस्ट्रेट भी लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं।
पुलिस ने लोगों को यमुना नदी के पास न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। प्रशासन लगातार स्थिति को सामान्य करने के प्रयास कर रहा है।
स्थानीय निवासियों का रोष
उत्तरकाशी में यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव स्यान चट्टी में मलबे से बनी झील को लेकर शुक्रवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। नाराज ग्रामीण, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, झील की ओर कूच कर गए और आधे पानी में उतरकर नारेबाजी शुरू कर दी।
ग्रामीणों का आरोप है कि 29 जून को ही प्रशासन को झील बनने की जानकारी दे दी गई थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन की लापरवाही से संकट गहरा गया है। ग्रामीणों ने मांग की कि झील को तत्काल खाली कराया जाए ताकि निचले इलाकों पर मंडरा रहा खतरा टल सके।
मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा — “स्थानीय लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। प्रशासन द्वारा सभी सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। मलबे से बनी कृत्रिम झील को खोलने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां मौके पर मौजूद हैं। जैसे ही परिस्थितियां अनुकूल होंगी, झील को सुरक्षित तरीके से खाली कराया जाएगा।”
इधर, ग्रामीणों में संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर दहशत बनी हुई है, जबकि प्रशासन ने दावा किया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

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