हरक सिंह रावत बनेंगे कांग्रेस की चुनौती, भाजपा की रणनीतिक बैठक में संगठन की मजबूती पर जोर

देहरादून। दिल्ली में आयोजित भाजपा की उच्चस्तरीय बैठक में पंचायत चुनावों की सफलता, आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति और संगठनात्मक पुनर्गठन पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, सह प्रभारी रेखा वर्मा, मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सांसद अजय भट्ट, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह और प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार शामिल रहे।

बैठक में हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों में मिली जीत को सरकार और संगठन के समन्वय का परिणाम बताया गया। सांसदों ने आपदा प्रबंधन और जनकल्याणकारी योजनाओं की सराहना करते हुए संगठन की सक्रियता को आगामी चुनावों के लिए निर्णायक बताया।

प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 2027 के चुनावों को लेकर पार्टी पूरी तरह तैयार है। सांसदों की मंडल और बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की योजना पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों में मिली अभूतपूर्व सफलता ने संगठन की ताकत को साबित किया है।

हरक सिंह रावत को लेकर पूछे गए सवाल पर भट्ट ने तीखा जवाब देते हुए कहा, “जनता ने उन्हें पहले ही उनकी हैसियत दिखा दी है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, हरक सिंह कांग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत बनेंगे।”

युवा मोर्चा पदाधिकारी से जुड़े एक मामले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपी पुलिस हिरासत में है और पार्टी ने उसे सभी पदों से तत्काल हटा दिया है। भाजपा की सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है, इसलिए दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।

प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम ने बताया कि इस तरह की बैठकें समय-समय पर होती रहती हैं, जिनमें सरकार और संगठन के कार्यों की समीक्षा और आगामी योजनाओं पर विचार होता है। उत्तराखंड में आई आपदाओं के बाद सरकार द्वारा किए गए राहत कार्यों की जानकारी साझा की गई और भविष्य की रणनीतियों पर सुझाव मांगे गए।

प्रधानमंत्री के जन्मदिन से लेकर सेवा पखवाड़े तक के कार्यक्रमों की रूपरेखा भी बैठक में तैयार की गई। सांसदों की अनुपस्थिति पर उन्होंने कहा कि कुछ सांसद निजी कार्यक्रमों या सांगठनिक जिम्मेदारियों के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके। वहीं त्रिवेंद्र सिंह रावत की नाराजगी को लेकर उन्होंने कहा कि वे इतने वरिष्ठ नेता हैं कि उनसे नाराजगी की बात करना ही गलत है।

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