देहरादून । रायपुर स्थित ओप्टो इलेक्ट्रॉनिक फैक्ट्री में निजी कंपनी द्वारा कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों से हर महीने 4 से 5 हजार रुपये अवैध रूप से वसूलने और दुर्व्यवहार करने के आरोपों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकालने और फर्जी मुकदमे दर्ज कराने की धमकी दी जाती है।
शुक्रवार सुबह नाराज़ कॉन्ट्रैक्ट मजदूर कार्य बहिष्कार की तैयारी में फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर जुटे। फैक्ट्री प्रबंधन ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उत्तराखंड के युवा इंटक प्रदेश अध्यक्ष पंकज क्षेत्री अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंच गए, जिससे मजदूरों का मनोबल बढ़ा। इसके बाद जिलाध्यक्ष अनिल कुमार, सचिव देव सिंह पंवार और युवा इंटक प्रदेश अध्यक्ष पंकज क्षेत्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारी अवधेश कुमार यादव से मुलाकात की।
लंबी वार्ता के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया कि दोषी निजी कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जब तक नई कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया जाता, तब तक मजदूरों को फैक्ट्री सीधे उनके खातों में वेतन देगी।

पंकज क्षेत्री ने कहा कि यह मामला केवल ओप्टो इलेक्ट्रॉनिक फैक्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य व केंद्र सरकार के दायरे में आने वाले कई रक्षा और अर्धसरकारी प्रतिष्ठानों में भी ठेकेदार इसी तरह कर्मचारियों का शोषण करते हैं। अक्सर ठेकेदार मजदूरों से एटीएम कार्ड ले लेते हैं और वेतन का बड़ा हिस्सा निकालकर अपने पास रख लेते हैं। विरोध करने वालों को नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। दुर्भाग्य यह है कि नौकरी छोड़ने वालों की जगह लेने को दूसरा मजदूर तुरंत तैयार हो जाता है, जिससे शोषण का यह चक्र लगातार चलता रहता है।
युवा इंटक प्रदेश अध्यक्ष पंकज क्षेत्री ने कहा कि “हम सरकार पर यह दबाव बनाएंगे कि ऐसे शोषण को रोकने के लिए श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाए। जिन ठेकेदारों की करतूतें उजागर होती हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। मजदूरों के हक और सम्मान की लड़ाई में इंटक हमेशा मजबूती से खड़ा रहेगा।”

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