देहरादून । पीवैल्यू एनालिटिक्स कंपनी द्वारा जारी राष्ट्रीय वार्षिक रिपोर्ट और सूचकांक (NARI) 2025 में देहरादून को महिलाओं के लिए “असुरक्षित शहर” घोषित करने के विवादास्पद दावों ने राज्य प्रशासन, महिला आयोग और स्थानीय समुदायों में गहरी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। आज इस मामले में दोहरी कार्रवाई देखने को मिली, जहाँ महिला आयोग और पुलिस दोनों ने अलग-अलग बैठकों में कंपनी के प्रतिनिधियों से जवाब तलब किया।
महिला आयोग ने ठोस सबूतों की माँग की
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल की अगुआई में आयोजित बैठक में कंपनी के प्रतिनिधि मयंक ढैय्या उपस्थित हुए। आयोग ने NARI 2025 रिपोर्ट में उल्लेखित सर्वेक्षण पद्धति, डेटा संग्रह प्रोटोकॉल और निष्कर्षों की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए।
श्रीमती कंडवाल ने बताया, “रिपोर्ट में कई गंभीर विसंगतियाँ हैं। सर्वे में शामिल महिलाओं का डेमोग्राफिक विवरण, प्रश्नावली की प्रामाणिकता, और टेलीफोनिक सर्वे का मेथडोलॉजी पूरी तरह से अस्पष्ट है। यह रिपोर्ट न केवल अवैज्ञानिक प्रतीत होती है, बल्कि इससे देहरादून की सामाजिक-आर्थिक छवि को नुकसान पहुँचाने का प्रयास भी दिखाई देता है।”
आयोग ने कंपनी को एक सप्ताह के भीतर निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने का आदेश दिया है:
· सर्वेक्षण में भाग लेने वाली महिलाओं की पूरी सूची
· प्रयोग किए गए प्रश्नों का सेट और डेटा संग्रह का माध्यम
· रिसर्च टीम के सदस्यों और उनकी योग्यता का विवरण
· सर्वे से जुड़ी सभी बैठकों की मिनट्स
अगली सुनवाई 15 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है, जिसमें कंपनी के प्रबंध निदेशक और रिसर्च टीम के सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
पुलिस जाँच में भी कंपनी फेल
इसी क्रम में, एसएसपी देहरादून कार्यालय में भी पीवैल्यू एनालिटिक्स के प्रतिनिधि से पूछताछ की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कंपनी के प्रतिनिधि यह साबित करने में विफल रहे कि सर्वेक्षण वैज्ञानिक और नैतिक मानकों के अनुरूप आयोजित किया गया था।
एसपी ऋषिकेश ने कहा, “कंपनी का दावा है कि यह रिपोर्ट एकेडमिक रिसर्च के लिए तैयार की गई थी, लेकिन उन्होंने कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए। डेटा कलेक्शन और एनालिसिस की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है, और रिपोर्ट के निष्कर्षों से देहरादून की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचा है।”
पुलिस ने भी कंपनी को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है, जिसके भीतर उन्हें सभी आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने होंगे।
स्थानीय व्यापार और शिक्षा समुदाय ने जताया आक्रोश
इस रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद से ही देहरादून के व्यापारिक और शैक्षणिक समुदायों में रोष व्याप्त है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री राजीव मल्होत्रा ने कहा, “इस तरह की अवैज्ञानिक रिपोर्ट्स से पर्यटन उद्योग को गंभीर नुकसान हो रहा है। होटल बुकिंग में 20% की कमी आई है, और कई परिवारों ने अपनी बेटियों को देहरादून भेजने पर पुनर्विचार किया है।”
वहीं, देहरादून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अनिता शर्मा ने कहा, “यदि यह रिपोर्ट वास्तव में एकेडमिक उद्देश्यों के लिए तैयार की गई थी, तो कंपनी को इसे सार्वजनिक करने से पहले उचित सत्यापन प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी।”
कंपनी का पक्ष
कंपनी के प्रतिनिधि मयंक ढैय्या ने दोनों बैठकों में कहा कि रिपोर्ट का उद्देश्य किसी शहर की छवि को धूमिल करना नहीं था, और यह केवल एक शैक्षणिक अध्ययन का हिस्सा थी। हालाँकि, वे रिपोर्ट के मेथडोलॉजिकल पहलुओं पर संतोषजनक प्रमाण प्रस्तुत करने में विफल रहे।
आगे की कार्रवाई
यदि कंपनी एक सप्ताह के भीतर सम्पूर्ण और प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहती है, तो महिला आयोग और पुलिस दोनों ने भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार कंपनी के खिलाफ आर्थिक प्रतिकूल प्रभाव के लिए मुकदमा दायर करने पर विचार कर रही है।
इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर डेटा नैतिकता और सार्वजनिक रिपोर्टिंग के मानकों पर गंभीर बहस छेड़ दी है। देहरादून की जनता और प्रशासन की नजर अब 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहाँ इस रिपोर्ट की वैधता का अंतिम निर्णय होना है।

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