केंद्रीय टीम का उत्तराखंड दौरा, राहत पैकेज की तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड में बारिश और भूस्खलन से हुई भारी तबाही का आकलन करने के लिए भारत सरकार की अंतर-मंत्रालयीय केंद्रीय टीम ने सोमवार को राज्य के विभिन्न जिलों का व्यापक दौरा किया। टीम ने उत्तरकाशी और चमोली जिलों के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया और प्रभावित नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया।

टीम के दौरे की शुरुआत यूएसडीएमए स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक से हुई। इस बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से आपदा से हुई क्षति का ब्योरा प्रस्तुत किया। सुमन ने बताया, “इस वर्ष सामान्य से कहीं अधिक बारिश के कारण राज्य को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। धराली और थराली जैसी भीषण आपदाओं ने हमारे बुनियादी ढांचे को गंभीर रूप से क्षतिगस्त किया है।”

उन्होंने आगे कहा, “कृषि, बागवानी, पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों सहित आजीविका के सभी साधनों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार प्रभावितों के जीवन को सामान्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, और इस दिशा में केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है।”

उत्तरकाशी: धराली-हर्षिल क्षेत्र में व्यापक विनाश
उत्तरकाशी पहुंची टीम के पहले दल ने धराली-हर्षिल क्षेत्र का गहन निरीक्षण किया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने टीम को जन-धन हानि और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान के विस्तृत आंकड़े प्रदान किए। टीम ने मुखबा, हर्षिल और धराली के प्रभावित निवासियों से सीधा संवाद किया।

स्थानीय निवासियों ने अपने मकानों, होटलों, बगीचों, फसलों और व्यवसायों को हुए भारी नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने त्वरित पुनर्वास, पर्याप्त मुआवजा और रोजगार के अवसरों की मांग करते हुए कहा कि आपदा ने उनकी आजीविका के सभी साधन छीन लिए हैं।

टीम लीडर और संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना ने कहा, “हम प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर रहे हैं। क्षति का विस्तृत आकलन करने के बाद एक संपूर्ण रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर राहत पैकेज की घोषणा की जाएगी।”

चमोली: थराली क्षेत्र के गांवों का हवाई व स्थलीय निरीक्षण
चमोली जिले के थराली क्षेत्र में पहुंची दूसरी टीम ने चेपड़ो, कोटडीप, इराडीबगड़, देवाल के मोपाटा और नंदानगर जैसे गंभीर रूप से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने कुलसारी रिलीफ सेंटर में आयोजित बैठक में पीपीटी के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

तिवारी ने बताया, “लगातार वर्षा और भूस्खलन ने सड़कों, पुलों, भवनों, पेयजल योजनाओं, बिजली तंत्र और कृषि को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट गया है, और सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित होना पड़ा है।”

टीम ने स्थानीय निवासियों से बातचीत में पाया कि आवागमन की सुविधाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। अनेक स्थानों पर मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, और लोगों को अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर होना पड़ा है।

टीम लीडर डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य आपदा से हुई वास्तविक क्षति का सटीक आकलन करना है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही प्रभावित क्षेत्रों के लिए आवश्यक सहायता एवं पुनर्निर्माण कार्यों की योजना बनाई जाएगी।”

आगे की कार्यवाई
मंगलवार को टीम के दोनों दल क्रमशः रुद्रप्रयाग-पौड़ी और बागेश्वर-नैनीताल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। टीम द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़ों और निष्कर्षों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी।

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि टीम मंगलवार शाम को देहरादून लौट आएगी और उसके बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस दौरे में यूएलएलएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार तथा सलाहकार डॉ. मोहित पूनिया नोडल अधिकारी के तौर पर टीम के साथ थे।

इस बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद ओबेदुल्लाह अंसारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

केंद्र सरकार द्वारा जल्द ही एक व्यापक राहत पैकेज की घोषणा की उम्मीद है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाई जा सकेगी।

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