देहरादून जिले में *13 सितम्बर 2025* को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने ऐतिहासिक सफलता अर्जित की। जिला मुख्यालय देहरादून सहित बाह्य न्यायालय—विकासनगर, डोईवाला, ऋषिकेश और मसूरी—में एक ही दिन में *14,445* मामलों का निस्तारण किया गया। इस उत्कृष्ट आयोजन के परिणामस्वरूप जिले में लंबित वादों की संख्या अब एक लाख से कम पर सिमट आई है। साथ ही निस्तारित मामलों से कुल *260,028,167* रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
इस उपलब्धि में *जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल* की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा ने न केवल अधीनस्थ न्यायालयों में कार्य गति को बढ़ाया, बल्कि पक्षकारों के बीच सुलह और न्याय की भावना को भी मजबूत किया। जिला जज की संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और न्यायप्रियता ने न्यायिक परिवार को नई ऊर्जा दी और जनता के विश्वास को और प्रगाढ़ किया।
अदालत में निस्तारित मामले
इस लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के वादों को सुनवाई हेतु रखा गया। इनमें मोटर दुर्घटना क्लेम, सिविल मामले, चेक बाउंस, पारिवारिक विवाद और शमनीय प्रकृति के आपराधिक मामलों सहित कई प्रकरण शामिल रहे।
– फौजदारी के शमनीय प्रकृति के मामले – *195*
– बैंक संबंधी मामले – *1055*
– धन वसूली के मामले – *19*
– मोटर दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल के मामले – *76*
– पारिवारिक विवाद के मामले – *128*
– मोटर-वाहन अपराध के मामले – *12,902*
– अन्य सिविल मामले – *70*
इन सबको मिलाकर कुल *11,374* मामलों में समझौता हुआ और *180,422,049* रुपये का राजस्व प्राप्त किया गया।

बाह्य न्यायालयों का योगदान
– **विकासनगर न्यायालय** – *1,900* मामलों का निस्तारण, *22,075,346* रुपये प्राप्त
– **ऋषिकेश न्यायालय** – *912* मामले निपटाए गए, *43,637,502* रुपये का राजस्व
– **डोईवाला न्यायालय** – *225* मामलों का निस्तारण, *9,872,507* रुपये प्राप्त
– **मसूरी न्यायालय** – *34* मामलों का निस्तारण, *4,020,763* रुपये प्राप्त प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान
इस लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर के *6,901* मामलों का भी निस्तारण किया गया। इन प्रकरणों में *36,059,775* रुपये से अधिक की राशि पर समझौते हुए, जिससे पक्षकार बिना मुकदमेबाजी में पड़े न्याय प्राप्त कर सके।
प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान
इस लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर के *6,901* मामलों का भी निस्तारण किया गया। इन प्रकरणों में *36,059,775* रुपये से अधिक की राशि पर समझौते हुए, जिससे पक्षकार बिना मुकदमेबाजी में पड़े न्याय प्राप्त कर सके।
पूर्व का उत्कृष्ट प्रदर्शन
देहरादून की यह उपलब्धि नई नहीं है। *10 मई 2005* को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में भी जिले ने रिकॉर्ड कायम किया था, जब *12,675* मामलों का निस्तारण एक ही दिन में किया गया था।
सरल और त्वरित न्याय का माध्यम
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं वरिष्ठ सिविल जज सीमा डुँगराकोटी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालतें सुलह और समझौते की भावना को प्रोत्साहन देती हैं। इससे समाज में भाईचारे और शांति का वातावरण बनता है। लोक अदालत के आदेश अंतिम होते हैं तथा पक्षकारों को जमा न्यायशुल्क भी वापस कर दिया जाता है। इस कारण यह मंच सरल और त्वरित न्याय प्राप्त करने का एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो रहा है।

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