नई दिल्ली: केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं और संस्कृति के पुनर्जागरण का एक स्वर्णिम काल चल रहा है।
अपने संदेश में, अमित शाह ने कहा कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को अब केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि तकनीक, विज्ञान, न्याय, शिक्षा और प्रशासन की धुरी बनना चाहिए। उन्होंने ‘डिजिटल इंडिया’, ‘ई-गवर्नेंस’, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और ‘मशीन लर्निंग’ के इस युग में भारतीय भाषाओं को भविष्य के लिए सक्षम बनाने पर जोर दिया।
अमित शाह ने ‘मिलकर चलो, मिलकर सोचो, मिलकर बोलो’ को हमारी भाषाई और सांस्कृतिक चेतना का मूल मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि हमारी भाषाएँ सदियों से संस्कृति, इतिहास, ज्ञान-विज्ञान और आध्यात्म को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम रही हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गुलामी के दौर में भी भारतीय भाषाएँ प्रतिरोध की आवाज बनीं और आजादी के आंदोलन को राष्ट्रव्यापी बनाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। 14 सितंबर, 1949 को देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकृत किया गया था, और संविधान के अनुच्छेद 351 में हिंदी के प्रचार-प्रसार का दायित्व सौंपा गया है।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र, जी-20 और SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी और भारतीय भाषाओं में संवाद कर उनका स्वाभिमान बढ़ाया है। उन्होंने यह भी बताया कि 2024 में हिंदी दिवस पर ‘भारतीय भाषा अनुभाग’ की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं के बीच सहज अनुवाद सुनिश्चित करना है।
अमित शाह ने संदेश के अंत में कहा कि हमें हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें साथ लेकर आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
हिन्दी दिवस पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संदेश
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