देहरादून। देहरादून में जब आपदा अपने चरम पर है और प्रशासनिक अधिकारी राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं, ऐसे समय में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी द्वारा जिलाधिकारी के साथ किया गया अशोभनीय व्यवहार तीव्र आलोचना का विषय बन गया है।
मौके पर मौजूद सूत्रों के अनुसार, मंत्री जोशी ने आपदा स्थल पर निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी से तीखे शब्दों में संवाद किया, जो न केवल प्रशासनिक मर्यादाओं के विरुद्ध था, बल्कि उस अधिकारी के मनोबल को भी प्रभावित करने वाला था जो जान जोखिम में डालकर जनसेवा में लगा हुआ है।
इस संबंध में उत्तराखंड युवा प्रदेश इंटक के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता पंकज क्षेत्री ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मंत्री गणेश जोशी के आचरण की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह समय अधिकारियों का मनोबल बढ़ाने का है, न कि उन्हें अपमानित करने का।
क्षेत्री ने यह भी कहा कि मंत्री गणेश जोशी को यह स्मरण रहना चाहिए कि वह पहले से ही अधिक संपत्ति के मामले में आरोपी के घेरे में हैं और उनके विरुद्ध सीबीआई जांच चल रही है। ऐसे में उन्हें अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए संयमित व्यवहार करना चाहिए, न कि अधिकारियों के समक्ष अपनी हनक दिखाकर लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन करना चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आपदा के समय जनप्रतिनिधियों की भूमिका सहयोग और समन्वय की होती है, न कि शक्ति प्रदर्शन की। यदि मंत्री स्वयं ही प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करेंगे, तो इससे राहत कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और जनता को नुकसान उठाना पड़ेगा।
पंकज क्षेत्री ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और मंत्री के व्यवहार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि प्रशासनिक अधिकारियों को भयमुक्त वातावरण में कार्य करने की स्वतंत्रता मिले और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हो सके।

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