हल्द्वानी में सीजीएचएस वेलनेस सेंटर की स्वीकृति से पेंशनर्स में खुशी, नैनीताल में दी गई स्वीकृति पर उठे सवाल

देहरादून। उत्तराखंड केंद्रीय पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने हल्द्वानी में सीजीएचएस वेलनेस सेंटर को मंजूरी मिलने का जोरदार स्वागत किया है, लेकिन साथ ही नैनीताल में एक और केंद्र की स्वीकृति को ‘अनुचित’ बताते हुए इसका विरोध किया है। संगठन ने मांग की है कि इसके बजाय श्रीनगर या कोटद्वार में शीघ्र एक वेलनेस सेंटर खोला जाए।

संगठन की कार्यकारिणी की बैठक बुधवार को देहरादून स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब के निकट एक रेस्टोरेंट के सभागार में हुई। उत्तराखंड केंद्रीय पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविन्द्र दत्त सेमवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वित्त मंत्रालय द्वारा 27 अगस्त को हल्द्वानी के केंद्र को दी गई स्वीकृति का स्वागत किया गया और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया गया।

हालाँकि, बैठक में इस बात पर रोष जताया गया कि श्रीनगर या कोटद्वार की बजाय नैनीताल में एक वेलनेस सेंटर को मंजूरी देना अनुचित और औचित्यहीन है। पेंशनर्स ने तत्काल प्रभाव से श्रीनगर या कोटद्वार में एक केंद्र खोलने की मांग को दोहराया।

बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण मांग उठाई गई कि हाथी बड़कला (देहरादून) स्थित सर्वे डिस्पेंसरी के दून सीजीएचएस में विलय की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए।

संगठन के फैसले:
संगठन के महासचिव सुरेंद्र चौहान ने बताया कि बैठक में कई अहम फैसले भी लिए गए। संगठन के परिवर्तित नाम का स्वागत करते हुए अन्य जनपदों के सदस्यों को शामिल करने के लिए कार्य समिति के पदों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया। संगठन का अगला द्विवार्षिक अधिवेशन अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में आयोजित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही, संगठन का आजीवन सदस्यता शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया।

इसके अलावा, डीओपीटी के पेंशन पोर्टल पर पंजीकृत देशभर के 57 संगठनों के लिए अनुदान हेतु प्राप्त स्कोर शीट को पूर्ण करने और इसे शीघ्र ही संबंधित मंत्रालय को भेजने का निर्णय लिया गया।

बैठक में उपस्थिति:
इस बैठक में अध्यक्ष रविन्द्र सेमवाल, महासचिव सुरेंद्र चौहान, संरक्षक एन. एन. बलूनी, उपाध्यक्ष आई. एस. पुंडीर, संयुक्त सचिव अशोक शंकर, प्रचार सचिव पी. के. सिंह, वित्त सचिव अनिल उनियाल, ऑडिटर एडवोकेट आर. पी. उनियाल, श्रीमती मधु अरोड़ा, के. पी. मैथानी, उमेश्वर रावत, स्वामी एस. चंद्रा, जयानन्द, श्रीकांत विमल एवं राजेंद्र प्रसाद आदि ने अपने विचार रखे।

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