जिलाधिकारी ने पैदल नापा 8 किमी का दुर्गम रास्ता, आपदा ग्रस्त फुलेत पहुंचे

जनता से रूबरू दिया सरकार का संदेश: “हर हाल में आपके साथ है प्रशासन”

देहरादून।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों का पालन करते हुए जनपद प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी को ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में निभाते हुए सबसे दुर्गम और आपदा से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र फुलेत तक पहुंचकर एक मिसाल कायम की है। जिलाधिकारी सविन बंसल सीधे तौर पर ग्राउंड जीरो पर पहुंचे और प्रभावितों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनी।

जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर छमरौली तक का सफर दुर्गम सड़कों से पूरा करने के बाद, छमरौली से फुलेत तक का आखिरी 8 किलोमीटर का पैदल मार्ग जिलाधिकारी ने अपने प्रशासनिक अमले के साथ पैदल तय किया। इस दौरान आपदा में धुल चुकी पुलियाएं, पुल, सड़कें और पगडंडियां मुश्किलें पैदा कर रही थीं, लेकिन डीएम और टीम ने गाढ़ (गहरी नदियाँ), गदेरे (नाले), ढौंड और ढंगार (पहाड़ी चट्टानें और ढलान) पार करके प्रभावित परिवारों तक सीधी पहुंच बनाई।

गौरतलब है कि अब तक इस क्षेत्र तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा का ही सहारा लिया जा रहा था। लेकिन जिलाधिकारी ने हेली सेवा के विकल्प को छोड़कर जमीनी हकीकत से रूबरू होने और प्रभावितों का हौसला बढ़ाने के लिए इस दुर्गम पैदल मार्ग को चुना।

फुलेत पहुंचकर डीएम बंसल ने आपदा से हुई क्षति का जायजा स्वयं लिया। उन्होंने जनमानस की समस्याओं को गौर से सुना और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनजीवन को युद्ध स्तर पर काम करके जल्द से जल्द सामान्य किया जाए। उन्होंने प्रभावितों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार और प्रशासन हर हाल में उनके साथ खड़ा है।

इस दौरान डीएम के साथ एसडीएम, तहसीलदार, राहत एवं बचाव दल के सदस्य व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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