देहरादून । उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस हाई-प्रोफाइल घोटाले के मुख्य आरोपी खालिद मलिक को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले उसकी बहन साबिया को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, जबकि अन्य आरोपी सुमन, हिना और एक व्यक्ति के खिलाफ रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, खालिद केंद्रीय लोक निर्माण विभाग में संविदा जेई के पद पर कार्यरत था और परीक्षा के दिन खुद हरिद्वार के एक केंद्र पर परीक्षा देने पहुंचा था। उसी सुबह उसने असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान से संपर्क कर अपनी बहन की मदद के बहाने पेपर लीक की साजिश को अंजाम दिया। सुमन को व्हाट्सएप पर प्रश्न पत्र की तस्वीरें भेजी गईं, जिनके उत्तर उसने हाथ से लिखकर महज 10 मिनट में वापस भेज दिए।
एसआईटी जांच में सामने आया कि सुमन को सुबह 7:55 बजे खालिद का मैसेज मिला, जिसमें परीक्षा में मदद की बात कही गई थी। 11:35 बजे सुमन को प्रश्न पत्र के तीन पेज मिले, जिनमें 12 सवाल थे। 11:45 बजे सुमन ने उनके उत्तर खालिद को भेज दिए। इसके बाद सुमन को संदेह हुआ और उसने अपनी बहन सीमा से बात की, जिसने बॉबी पंवार का नाम सुझाया। सुमन ने बॉबी से संपर्क कर प्रश्न पत्र और उत्तर भेजे, लेकिन बॉबी ने मामले को दबाने की सलाह दी। पुलिस का कहना है कि यदि समय रहते अधिकृत विभागों को सूचना दी जाती, तो पेपर लीक को रोका जा सकता था।

एसएसपी अजय सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रविवार को ही विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। सोमवार को रिपोर्ट आने के बाद भर्ती में अनुचित साधन रोकथाम एवं निवारण अध्यादेश 2023 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इससे पहले कुख्यात नकल माफिया हाकम सिंह और उसके सहयोगी पंकज गौड़ को गिरफ्तार किया जा चुका है। हाकम पूर्व में भी भर्ती घोटालों में आरोपी रह चुका है और फिलहाल जमानत पर बाहर था।
एसपी देहात जया बलोनी को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस की तकनीकी टीम ने खालिद की लोकेशन ट्रैक कर उसे गिरफ्तार किया। उसके मोबाइल को भी कब्जे में लिया गया है, जिससे कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। अब तक साबिया, सुमन और हिना को हिरासत में लिया जा चुका है, और खालिद की गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क के खुलासे की संभावना बढ़ गई है।
पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह की गतिविधियों की ओर इशारा करता है, जो लाखों रुपये में अभ्यर्थियों को पास कराने की डील करता था। खालिद की गिरफ्तारी से पेपर लीक की परतें खुलने लगी हैं और जल्द ही अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।
जैमर की चूक बनी पेपर लीक की बड़ी वजह
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि जिस परीक्षा केंद्र में खालिद मलिक परीक्षा दे रहा था, वहां कुल 18 कमरे थे, लेकिन केवल 15 कमरों में ही जैमर लगाए गए थे। हैरानी की बात यह है कि कमरा नंबर 9, 17 और 18 में जैमर नहीं लगे थे—और खालिद ठीक उसी कमरे (नंबर 9) में परीक्षा दे रहा था। पुलिस को आशंका है कि इसी तकनीकी चूक का फायदा उठाकर खालिद ने किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से प्रश्न पत्र के तीन पेज अपनी बहन साबिया को भेजे। इसके बाद साबिया ने वह सामग्री असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान तक पहुंचाई, जिससे पूरे पेपर लीक कांड की शुरुआत हुई।अब एसआईटी परीक्षा केंद्र के सभी कर्मचारियों और जैमर टीम से पूछताछ कर रही है.
यह मामला राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करता है।

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