हरिद्वार में आपदा आकलन बैठक: दीर्घकालिक समाधान की रणनीति पर जोर

हरिद्वार। मानसून सत्र 2025 के दौरान हरिद्वार जनपद में आई बाढ़ और भूस्खलन से हुई व्यापक क्षति के आकलन हेतु राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा गठित पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) टीम ने रविवार को जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की। इस टीम का नेतृत्व केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) के चीफ साइंटिस्ट डॉ. अजय चौरसिया ने किया। बैठक के साथ-साथ टीम ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण भी किया, जिसमें भीमगोड़ा पुल के पास रेलवे ट्रैक पर बार-बार गिर रहे मलवे और मंशा देवी क्षेत्र के संभावित भू-स्खलन स्थलों को शामिल किया गया।

बैठक का संचालन हरिद्वार-ऋषिकेश विकास प्राधिकरण (HRDA) के सचिव मनीष कुमार सिंह ने किया। उन्होंने जनपद की सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक और भौगोलिक स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी और मानसून काल में हुई क्षति का पावर पॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से विश्लेषण प्रस्तुत किया।

डॉ. चौरसिया ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आपसी समन्वय से एक प्रभावी कार्य योजना तैयार की जाए, जिसे भारत सरकार को भेजा जा सके। उन्होंने सिंचाई विभाग के अभियंताओं को निर्देश दिए कि बाढ़ और भू-कटाव से बचाव हेतु दीर्घकालिक और स्थायी समाधान सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आकलन इस प्रकार होना चाहिए कि भविष्य में आपदा की पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने नदियों के तटबंधों से संबंधित प्रस्ताव तैयार करने, वॉश आउट हुई सड़कों के लिए स्थायी समाधान सुझाने, और संचार व्यवस्था के लिए वैकल्पिक योजना (प्लान बी) बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सीवर, ड्रेनेज और एसटीपी निर्माण से जुड़े कार्यों के लिए भी ठोस कार्य योजना तैयार करने पर बल दिया।

PDNA टीम ने जनहानि, पशुहानि, भवन क्षति और अन्य विभागीय नुकसान का विस्तृत विवरण लिया। विद्युत, पिटकुल, सिंचाई, लोक निर्माण विभाग, शिक्षा, चिकित्सा, बाल विकास सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए। टीम ने PDNA से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की।

स्थलीय निरीक्षण के दौरान डॉ. चौरसिया ने मलवा गिरने और भू-स्खलन की समस्याओं के स्थायी समाधान हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावों को श्रेणीबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जाए और डेटा की सटीकता सुनिश्चित की जाए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी दीपेंद्र सिंह नेगी, एनडीएम प्रोफेसर डॉ. गगनदीप, एचपी यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. एम. शर्मा, स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. मोहित कुमार पूनिया, उप जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, जिला विकास अधिकारी वेदप्रकाश, आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत, जिला अर्थ संख्या अधिकारी नलिनी ध्यानी, जिला परियोजना प्रबंधक संजय सक्सेना, राजाजी टाइगर रिजर्व के रेंज ऑफिसर बृजेंद्र दत्त तिवारी, जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

यह बैठक हरिद्वार जनपद में आपदा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, जिसमें न केवल वर्तमान क्षति का आकलन किया गया, बल्कि भविष्य की आपदाओं से बचाव हेतु ठोस रणनीति पर भी विचार किया गया।

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