नियुक्तियों एवं स्थानान्तरण को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें निराधारः डॉ. मुकुल कुमार सती

प्रधानाचार्य भर्ती परीक्षा राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से होगी आयोजित

उच्च न्यायालय में विचाराधीन है सहायक अध्यापक (एलटी) की नियुक्तियां संबंधी वाद

देहरादून। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा विभाग की नियुक्ति एवं स्थानान्तरण संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों पर फैलायी जा रही अफवाहें पूरी तरह निराधार, भ्रामक एवं असत्य हैं।

डॉ. सती ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य शैक्षिक (अध्यापन संवर्ग) राजपत्रित सेवा नियमावली 2022 के अंतर्गत राजकीय इंटर कालेजों में प्रधानाचार्य के 692 पदों (50 प्रतिशत) को उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग, हरिद्वार के माध्यम से सीमित विभागीय परीक्षा द्वारा भरा जाना है। इस संबंध में आयोग द्वारा विज्ञप्ति प्रकाशित की जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा की तिथि निर्धारित की गयी है, किन्तु परीक्षा अभी सम्पन्न नहीं हुई है। उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग अपनी सभी परीक्षाओं का संचालन पूर्णतः पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से करता है और उसकी परीक्षा प्रणाली विश्वसनीयता एवं न्यायपूर्ण मूल्यांकन के लिए जानी जाती है। इसीलिए नियुक्ति में टोकन मनी/पैसे के लेन-देन जैसी बातें पूरी तरह निराधार हैं।

स्थानान्तरण को लेकर उन्होंने बताया कि विद्यालयों के कोटीकरण (सुगम/दुर्गम) संबंधी प्रकरण मा. उच्च न्यायालय नैनीताल में विचाराधीन होने के कारण शैक्षिक सत्र 2025-26 में वार्षिक स्थानान्तरण अधिनियम-2017 के अंतर्गत कोई स्थानान्तरण आदेश निर्गत नहीं किये गये हैं। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर भ्रामक बातें फैलायी जा रही हैं, जो विभाग की छवि को नुकसान पहुँचाने का प्रयास है।

सहायक अध्यापक (एलटी) पदों पर चयन प्रक्रिया के संबंध में डॉ. सती ने बताया कि उत्तराखण्ड अधीनस्थ चयन आयोग द्वारा 1352 पदों पर चयन कार्यवाही सम्पन्न की गयी है। लेकिन कुछ अभ्यर्थियों द्वारा मा. उच्च न्यायालय में वाद दायर करने के कारण नियुक्ति की प्रक्रिया बाधित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहायक अध्यापक (एलटी) के नियुक्ति अधिकारी संबंधित मण्डलों के अपर निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) हैं।

अंत में माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने चेतावनी दी कि नियुक्ति एवं स्थानान्तरण से जुड़ी असत्य एवं मिथ्यापूर्ण अफवाहें कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा विभाग की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं। शिक्षा विभाग अपनी सभी प्रक्रियाओं का संचालन पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं नियमों के अनुरूप करता है। यदि भविष्य में इस प्रकार की अफवाहें बिना साक्ष्यों एवं तथ्यों के फैलाई जाती हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधि सम्मत कड़ी कार्यवाही की जायेगी।

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