हल्द्वानी में धमाकेदार बॉक्सिंग मुकाबले: युवा फिस्टर्स ने जीते सोने-चांदी के तमगे

शिक्षा चंद की कोचिंग से चमके उत्तराखंड के सितारे

हल्द्वानी। नैनीताल जिले के मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम में गुरुवार को संपन्न राज्य स्तरीय बालक-बालिका बॉक्सिंग प्रतियोगिता ने खेलप्रेमियों को रोमांच के ठंडे पसीने चखा दिए। एसजीएफआई (स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) और निदेशालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस चार दिवसीय इवेंट (7 से 10 अक्टूबर) में उत्तराखंड के होनहार युवा मुक्केबाजों ने रिंग में आग उगल दी। प्रतियोगिता का समापन विजयी खिलाड़ियों को सम्मानित करने के साथ हुआ, जहां गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल्स ने नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पटल पर चमकने का वादा किया।
U-14 बालक वर्ग में तो उत्तराखंड के लालों ने कमाल कर दिया। यश दुर्गापाल, कुणाल सिंह भंडारी, कौस्तुभा रावत, देवांश भट्ट और तनिष चेट्टी ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया, जबकि लक्ष्य क्षेत्री और अनुराग रावत को सिल्वर, वहीं प्रथमेश वर्मा व अभिनव पंवार को ब्रॉन्ज नसीब हुआ। U-17 वर्ग में मयंक भट्ट और नाटिक प्रसाद ने सुनहरी चमक बिखेरी, मनीष करोंगा को सिल्वर मिला, जबकि अंश बिष्ट व अंकुश बिष्ट ने ब्रॉन्ज से संतोष किया। U-19 में अमित सिंह कठायत व अभय चौधरी ने गोल्ड जीतकर वरिष्ठ वर्ग में भी दबदबा कायम रखा।

अंतरराष्ट्रीय कोच शिक्षा चंद

इस चमकदार प्रदर्शन के पीछे छिपी है अंतरराष्ट्रीय कोच शिक्षा चंद की जादुई ट्रेनिंग। उनके मार्गदर्शन में तैयार ये युवा फिस्टर्स न सिर्फ राज्य स्तर पर छाए, बल्कि वरिष्ठ बॉक्सरों का मानना है कि जल्द ही ये राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अखाड़ों में उत्तराखंड का परचम लहराएंगे। एक वरिष्ठ खिलाड़ी ने कहा, “शिक्षा चंद जैसी ख्यातिप्राप्त कोच की ट्रेनिंग इतनी प्रभावी है कि ये बच्चे रॉकेट की स्पीड से ऊपर उड़ान भरेंगे। उनका दृष्टिकोण और तकनीक नई पीढ़ी को स्टील जैसा मजबूत बना रही है।”
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले जिलों के कोचों व अधिकारियों ने आयोजन की तारीफ की, लेकिन साथ ही बेहतर सुविधाओं की मांग भी उठाई। नैनीताल जिला बॉक्सिंग संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, यह इवेंट न केवल प्रतिभाओं को निखारता है, बल्कि राज्य स्तर पर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का माध्यम भी बन रहा है। विजेताओं को अब राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप में स्थान मिलेगा, जहां वे देश का नाम रोशन करने की तैयारी करेंगे।
उत्तराखंड खेल विभाग ने इस सफल आयोजन पर संतोष जताते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं राज्य के ग्रामीण इलाकों से भी प्रतिभाओं को सामने ला रही हैं। क्या पता, अगले ओलंपिक में इनमें से कोई रिंग में तिरंगा फहरा रहा हो!

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