वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में भारत को झटका, टॉप 100 से सभी शिक्षण संस्थान बाहर, आईआईएससी देश में नंबर 1

नई दिल्ली  ।  टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) ने वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 जारी कर दी है, जिसमें भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए निराशाजनक तस्वीर सामने आई है। इस साल दुनिया के टॉप 100 विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठित सूची में भारत का एक भी संस्थान जगह नहीं बना पाया है। हालांकि, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISB), बेंगलुरु 201-250 रैंक बैंड में आकर एक बार फिर देश का सर्वश्रेष्ठ संस्थान बना है।
वैश्विक स्तर पर, ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने लगातार दसवें साल अपना दबदबा कायम रखते हुए पहला स्थान हासिल किया है।
भारतीय विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन कैसा रहा?
टॉप 100 में एक भी संस्थान का शामिल न हो पाना भारतीय शिक्षा जगत के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, जो वैश्विक मंच पर हमारे संस्थानों के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है। देश के अन्य प्रमुख विश्वविद्यालयों की स्थिति देखें तो, जामिया मिलिया इस्लामिया को 401-500 रैंक बैंड में जगह मिली है। वहीं, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (क्च॥) और आईआईटी इंदौर 501-600 रैंक बैंड में आते हैं, जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) 601-800 रैंक बैंड में अपनी जगह बना पाया है।
हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह है कि इस रैंकिंग में शामिल कुल विश्वविद्यालयों की संख्या के मामले में भारत, अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है, जो भारतीय संस्थानों की बढ़ती वैश्विक भागीदारी को दर्शाता है।
दुनिया के टॉप 10 विश्वविद्यालय
वैश्विक पटल पर रैंकिंग में अमेरिकी विश्वविद्यालयों का दबदबा साफ तौर पर कायम है, जहां टॉप 10 में से 7 संस्थान अकेले अमेरिका के हैं। हालांकि, इस सूची में शीर्ष पर ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अपनी बादशाहत बरकरार रखी है। दूसरे स्थान पर अमेरिका की प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) का कब्जा है, जबकि तीसरे स्थान के लिए अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन की कैंम्ब्रीज़ यूनिवर्सिटी के बीच टाई हुआ है। यह परिणाम दिखाता है कि वैश्विक उच्च शिक्षा के शिखर पर अमेरिका और ब्रिटेन के संस्थानों का बोलबाला बना हुआ है।
एशिया में चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी 12वें और पेकिंग यूनिवर्सिटी 13वें स्थान पर रहीं। इस साल की रैंकिंग में 14 वर्षों में पहली बार एशियाई विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन में  गिरावट भी दर्ज की गई है, जिसका असर भारतीय संस्थानों पर भी दिखा है।

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