प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की हस्तियों में शुमार हैं पंडित जयतीर्थ मेवुंडी का नाम
देहरादून। शाही बन चुकी विरासत-2025 की शाम किराना घराने के प्रतिष्ठित कलाकार पंडित जयतीर्थ मेवुंदी द्वारा एक भावपूर्ण हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन प्रस्तुति का साक्षी बनी। उनकी प्रस्तुति ने अपनी गहराई, सटीकता और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से सभी श्रोताओं को मग्न मुग्ध कर दिया। उनके साथ हारमोनियम पर सुमित मिश्रा और तबले पर अभिषेक मिश्रा ने साथ दिया, जिनकी संवेदनशील और कुशल संगत ने गायन प्रस्तुति को बहुत ही शानदार और खूबसूरती बना दिया। पं. मेवुंदी ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत मधुर राग जोगकौंस से की, जिससे उनकी शक्तिशाली और मधुर वाणी ने शांति और भक्ति का वातावरण बना डाला।
पंडित जयतीर्थ मेवुंडी का नाम भारतीय शास्त्रीय संगीत की मशहूर कुछ ही नामचीन हस्तियों में शुमार है I उनकी भक्ति रस में डूबी हुई प्रस्तुति से विरासत की महफिल बेहतरीन खुशनुमा बनी नजर आई I पंडित जयतीर्थ मेवुंडी एक प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक हैं जिन्हें संगीत के पारखी प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय जिकन में बूंदी का नाम से भी जाना जाता है I साथ ही वे किराना घराने के प्रमुख गायक भी हैं । शास्त्रीय, अर्ध-शास्त्रीय, नाट्य-संगीत, दास-वाणी, अभंग वाणी, संतवाणी के क्षेत्र में अपनी महारथ के लिए वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं। वे वर्तमान में पीढ़ी के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली संगीतकारों में से एक हैं।

उनका जन्म 11 मई 1972 को हुबली, कर्नाटक में हुए । श्री मेवुंडी की संगीत यात्रा बहुत कम उम्र से ही पोषित हुई। संगीत से उनका प्रारंभिक परिचय उनकी मां के माध्यम से हुआ, जो भजन गाया करती थीं। यह प्रारंभिक प्रभाव कई स्थानीय लाइव संगीत समारोहों और रात भर चलने वाले वार्षिक संगीत सम्मेलनों में नियमित रूप से भाग लेने से और भी समृद्ध हुआ। मेवुंदी ने अपने गुरुओं पंडित अर्जुनसा नाकोड़ और बाद में पंडित श्रीपति पडिगर के मार्गदर्शन में पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा में कठोर प्रशिक्षण लिया I श्री मेवुंदी ने गोवा में आकाश वाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के लिए एक स्टाफ संगीतकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। 1995 में सवाई गंधर्व महोत्सव में शानदार प्रदर्शन के बाद उनका जीवन बदल गया। तब से उन्होंने अपने करियर में एक उल्लेखनीय संगीत यात्रा शुरू की है और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।यहां यह ही उल्लेखनीय है कि उन्होंने कन्नड़ और मराठी फिल्मों के लिए भी पार्श्व गायन भी किया । उनके पास हिंदुस्तानी शास्त्रीय रागों, अभंगों व कन्नड़ भक्ति गीतों की समृद्धडिस्कोग्राफी है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में श्री मेवुंदी का योगदान बहुआयामी है। उन्हें आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा 'ए टॉप' ग्रेड प्राप्त है, जो उनकी उत्कृष्टता का प्रमाण है। वर्ष 2019 में उन्हें नेपाल विश्वविद्यालय में "नाद योग" विषय में पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने रागों के कई नए रूपों की रचना भी की है। जिनमें विष्णुप्रिया राग परिमल रागके अलावा राग भिन्न गंधार, राग मधु प्रिया शामिल हैं। साथ ही उन्होंने सर्वोच्च भगवान के प्रति अपनी असीम भक्ति के साथ भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान वेंकटेश्वर, देवी लक्ष्मी, गुरु राघवेंद्र और कई अन्य पर कई बंदिशें लिखीं।

उन्हें भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा यंग मेस्ट्रो पुरस्कार, महाराष्ट्र सरकार द्वारा आदित्य विक्रमादित्य बिड़ला कला किरण पुरस्कार, श्री एससी जमीर भारत रत्न, पंडित भीमसेन जोशी स्वर भास्कर पुरस्कार, भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा संगीत नाटक अकादमी द्वारा पुरस्कार, स्वर सम्राट पं. बसवराज राजगुरु युवा पुरस्कार भी मिल चुके हैं I इसके अलावा उन पर और भी कई पुरस्कारों की बौछार हो चुकी है I

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