फिटनेस आइकॉन और एंटरप्रेन्योर कृष्णा श्रॉफ, जो हाल ही में अपने नए रियलिटी शो छोरियाँ चली गाँव के ज़रिए बमुलिया की एक जीवन बदल देने वाली यात्रा के बाद मुंबई लौटीं है। लौटने के बाद उन्होंने अपने शो के समय की सबसे प्यारी और यादगार झलकियों का एक खूबसूरत कैरोसेल साझा करते हुए पुरानी यादों की गलियों में एक भावनात्मक सफ़र किया। शो की फर्स्ट रनर-अप रहीं कृष्णा अपनी बमुलिया गाँव में अपने परिवर्तनकारी सफ़र की तस्वीरें पोस्ट कीं और कैप्शन दिया, एक समय की बात है प्तबमुलिया गाँव में। कृष्णा द्वारा साझा की गई तस्वीरों में उनके बमूलिया गाँव के अनुभव के कई अनमोल पल झलकते हैं — एक नन्हे बकरी के बच्चे को प्यार से गोद में लेने से लेकर सह-प्रतियोगियों से दोस्ती निभाने तक, ट्रैक्टर चलाने और ग्रामीण कामों में हाथ बँटाने से लेकर गाँववालों के साथ दिल से जुड़ने तक। हर तस्वीर उनके विकास, दोस्ती और उस सादगी की कहानी कहती है जिसने शो में उनके सफ़र को खास बनाया। कृष्णा की इन तस्वीरों में जो सबसे ज़्यादा नज़र आया, वह था उनके चेहरे पर झलकता सच्चा सुख और संतोष। कैरोसेल में उनके साथी प्रतिभागियों के साथ बिताए आत्मीय पल भी थे, जिनमें गर्मजोशी से गले मिलना और हँसी-मज़ाक करना शामिल था, सहज मुस्कानें – सब कुछ बखूबी दिखाई देता है। साथ ही गाँव की गतिविधियों में डूबी उनकी कुछ तस्वीरें भी थीं। कुछ तस्वीरों में वे सजाई गई इलेक्ट्रिक चेयर पर बैठी दिखती हैं (जो शायद किसी शॉकिंग टास्क का हिस्सा रही हो!), तो कुछ में वे ग्रामीणों से पारंपरिक कला-कौशल सीखती नजर आती हैं। हर तस्वीर से साफ़ झलकता है कि कृष्णा की अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलने की इच्छा हर तस्वीर में साफ़ दिखाई दे रही थी।
कुछ शांत पल भी कैद हुए हैं, जैसे दोस्तों के साथ सूर्यास्त देखना, बमूलिया की मिट्टी की खुशबू में खोए हुए और उस सादगी से जुड़ते हुए दिखाती हैं, जो किसी प्रतिस्पर्धा से कहीं आगे की चीज़ थी। उनकी पोस्ट में झलकता है वह सच्चा अपनापन और पुरानी यादों की मिठास, जिसने इस अनुभव को महज़ एक रियलिटी शो से कहीं ज़्यादा बना दिया।
यह कैरोसेल इस बात की याद दिलाता है कि कृष्णा ने छोरियाँ चली गाँव में बिताए समय को कितना प्यार किया। जिसमें उन्होंने न केवल यादगार पलों को दिखाया है, बल्कि सार्थक पलों को भी दर्शाया है – गाँव के खेती के अनुभवों से लेकर, जो उन्हें उनके पिता जैकी श्रॉफ के कृषि प्रेम से जोड़ते हैं, और गैजेट्स और स्मार्टफोन के बिना जीवन की सादगी में मिलने वाली खुशी।
उनके कमेंट सेक्शन में प्रशंसकों का प्यार उमड़ पड़ा, जिन्होंने पूरे शो के दौरान उनकी प्रामाणिकता की सराहना की, और कई लोगों ने बताया कि कैसे उनके सफर ने उन्हें जीवन के सरल सुखों को महत्व देने के लिए प्रेरित किया। अपनी भावनात्मक ट्रिब्यूट के साथ कृष्णा ने इस अध्याय को अलविदा कहा, जिससे यह स्पष्ट है कि बामुलिया उनके लिए सिफ़र् एक जगह नहीं था। यह एक ऐसा सफ़र था जिसने उनके दिल पर अमिट छाप छोड़ी।
कृष्णा श्रॉफ की ‘बमूलिया डायरी : छोरियाँ चली गाँव से जुड़ी दिल छू लेने वाली यादों की एक झलक
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