देहरादून। हरिद्वार के प्रतिष्ठित शुभम सिटी और पिरामिड कॉलोनाइज़र प्रोजेक्ट के मालिक संजीव गुप्ता ने अपने प्रोजेक्ट के विरुद्ध मीडिया के कुछ हिस्सों और सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों को “फर्जी, भ्रामक और दुष्प्रचार” बताया है। एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर गुप्ता ने इन समाचारों को बिना किसी प्रमाण के फैलाया गया झूठा प्रचार बताया और इसे उनके प्रोजेक्ट को बदनाम करने की साजिश करार दिया।
परियोजनाएँ पूर्णतः स्वीकृत और वैध:
संजीव गुप्ता ने स्पष्ट किया कि शुभम सिटी और पिरामिड कॉलोनाइज़र प्रोजेक्ट पूर्णतः वैध एवं हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) से स्वीकृत परियोजनाएँ हैं। उन्होंने दावा किया कि परियोजना से संबंधित सभी तकनीकी और प्रशासनिक कार्य पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विभागीय रिकॉर्ड या सरकारी आदेश में उनके विरुद्ध अनियमितता या कार्रवाई का कोई संकेत नहीं है।
भ्रामक खबरों के पीछे साजिश:
गुप्ता ने कहा कि हाल ही में ‘फर्जी कॉलोनी घोटाले’ से संबंधित भ्रामक खबरें प्रकाशित की गईं, जिनमें सहायक अभियंता, एचआरडीए का नाम और चित्र प्रदर्शित किया गया। उन्होंने इसे असत्य बताते हुए कहा कि यह सब उनके प्रोजेक्ट की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश का हिस्सा है।
FIR दर्ज, पुलिस जांच शुरू:
संजीव गुप्ता ने इस संदर्भ में आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला दिया:
- गढ़वाल मंडल आयुक्त के कार्यालय ने 20 सितंबर 2025 को सरोज रावत की शिकायत पर प्रदीप यादव और प्रमोद कुमार के विरुद्ध गंभीरता से जांच के निर्देश हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक को दिए थे।
- सरोज रावत ने प्राधिकरण को लिखे पत्र में स्पष्ट किया था कि ये दोनों व्यक्ति शुभम सिटी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं और झूठा दुष्प्रचार कर रहे हैं।
- शुभम सिटी के निवासियों द्वारा भी मुख्यमंत्री कार्यालय को सामूहिक प्रार्थना पत्र भेजकर प्रदीप यादव और प्रमोद कुमार के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
- इन शिकायतों के आधार पर, थाना बहादराबाद, जिला हरिद्वार में एफआईआर संख्या 0388 दिनांक 05/10/2025 दर्ज की गई है, जिसमें इन दोनों व्यक्तियों को नामजद किया गया है।
प्रोजेक्ट स्वामी संजीव गुप्ता ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे बिना प्रमाण के प्रकाशित असत्य समाचारों को तत्काल हटाएं और एचआरडीए के सहायक अभियंता के विरुद्ध फैलाए गए दुष्प्रचार का सार्वजनिक खंडन करें। उन्होंने आगाह किया कि भविष्य में मानहानिकारक सूचनाएँ प्रकाशित होने पर वे विधिक कार्यवाही करने के लिए बाध्य होंगे।

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