देहरादून। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) भारत सरकार ने उद्योग विभाग, उत्तराखण्ड सरकार के सहयोग से विश्व बैंक समर्थित ‘रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (RAMP)’ कार्यक्रम के अंतर्गत एक प्रतिस्पर्धात्मक संयुक्त कार्यशाला का आयोजन किया। इसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाना और केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी उद्यमियों तक पहुंचाना रहा।
कार्यशाला में एमएसएमई मंत्रालय व राज्य सरकार की प्रमुख योजनाएं जैसे ‘एमएसएमई चौंपियंस योजना’ और ‘राष्ट्रीय एससी/एसटी हब योजना’ पर चर्चा की गई। साथ ही RAMP कार्यक्रम की नई पहलें — ‘एमएसई गिफ्ट’, ‘एमएसई स्पाइस’, ‘एमएसएमई टीम’ और ‘ऑनलाइन डिस्प्यूट रेजोल्यूशन स्कीम’ की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में ईएसजी, TREDS और वित्तीय सहायता से जुड़ी जानकारियां भी साझा की गईं।
कार्यशाला का उद्घाटन विनय शंकर पांडेय, सचिव, मुख्यमंत्री, एमएसएमई एवं औद्योगिक विकास, उत्तराखण्ड सरकार ने किया। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था में 3.80 लाख एमएसएमई का योगदान महत्वपूर्ण है, जो कुल घरेलू उत्पाद का 47 प्रतिशत है। सरकार RAMP कार्यक्रम के तहत प्रतिस्पर्धा, स्थिरता और नवाचार को बढ़ावा दे रही है।

कार्यक्रम में मंत्रालय की निदेशक अंकिता पांडेय ने कहा कि उत्तराखण्ड ने एमएसएमई क्षेत्र के अनुकूल माहौल बनाने में सराहनीय प्रयास किए हैं। एमएसएमई टीम पहल के तहत डिजिटल व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ओएनडीसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के उद्यमियों को नए बाजारों से जोड़ा जा सकेगा।
महानिदेशक एवं आयुक्त उद्योग सौरभ गहरवार ने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे मंत्रालय की योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं। संयुक्त निदेशक अनुपम द्विवेदी ने कहा कि राज्य में RAMP गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन और उद्यमियों में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास लगातार जारी हैं।
कार्यक्रम में SIDBI, NSIC, Invoicemart और Polestarre सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों, उद्योग संघों, बैंकों तथा बड़ी संख्या में एमएसएमई उद्यमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन उत्तराखण्ड में एमएसएमई क्षेत्र की सतत प्रगति और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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