देहरादून/रामनगर। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रवक्ता और चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने रामनगर के आंदोलनकारियों के उस निर्णय का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपेक्षा से आहत होकर राज्य स्थापना दिवस के सरकारी कार्यक्रमों के बहिष्कार का ऐलान किया है।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि रामनगर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री पूरे दिन क्षेत्र में रहे, लेकिन राज्य आंदोलनकारियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए कुछ मिनट भी नहीं निकाल सके। उन्होंने कहा कि जो लोग राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाए, उनका ऐसा अपमान अस्वीकार्य है।
उन्होंने बताया कि आंदोलनकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को सम्मेलन में आमंत्रण देने का पत्र प्रमुख आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी के नेतृत्व में भेजा गया था, किन्तु मुख्यमंत्री ने उस सम्मान के निमंत्रण को स्वीकार नहीं किया। इससे राज्यभर के आंदोलनकारियों में गहरा आक्रोश है।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि जो सरकार आंदोलनकारियों की पहचान सुनिश्चित करने को तैयार नहीं, 2016 में लागू क्षैतिज आरक्षण को बहाल नहीं कर रही, गैरसैंण को राज्य की स्थायी राजधानी घोषित करने में टालमटोल कर रही और आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य की उपेक्षा कर रही है, उस सरकार के सम्मान समारोह में भाग लेने का कोई औचित्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि पंडित महावीर शर्मा, कामरेड राजा बहुना जैसे आंदोलनकारियों के लिए बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं तक देने में राज्य सरकार विफल रही है। ऐसे में आंदोलनकारी आठ नवंबर के सरकारी रजत जयंती समारोहों का बहिष्कार कर अपनी अस्मिता की लड़ाई जारी रखेंगे।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने पर आंदोलनकारियों को हर माह 20 हजार रुपये की पेंशन देगी, जिसका घोषणा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले ही कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का वचन और राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान की सच्ची गारंटी है।

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