“शहीदों की उपेक्षा नहीं सही जाएगी : करन माहरा”

माहरा ने मसूरी पहुँच कर शहीद स्थल पर अनशन पर बैठे वरिष्ठ आंदोलनकारी कमल भंडारी को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया

मसूरी। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष करन माहरा ने राज्य स्थापना दिवस पर शहीदों की उपेक्षा को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। माहरा स्वयं बुधवार को मसूरी स्थित शहीद स्थल पहुँचे, जहाँ राज्य आंदोलन के वरिष्ठ आंदोलनकारी कमल भंडारी ने शहीदों के प्रति हुई उपेक्षा से आहत होकर मुंडन कराकर आमरण अनशन शुरू किया था। माहरा ने भंडारी से लंबी बातचीत की और उन्हें जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।

इस मौके पर माहरा ने कहा, “आज दिल बहुत भारी है। मसूरी से लौटते वक्त मन में बस एक ही सवाल घूम रहा था कि क्या हमने ये राज्य इसी दिन के लिए बनाया था?” उन्होंने कहा कि श्री भंडारी जैसे लोग जिनके संघर्ष, त्याग और बलिदान की वजह से उत्तराखंड बना, आज उन्हीं की भावनाओं का कोई मोल नहीं रह गया है।

माहरा ने जोर देकर कहा, “शहीदों की प्रतिमाओं पर दीप तक नहीं जलाए गए। इससे बड़ा अपमान क्या हो सकता है?” उन्होंने आगे कहा, “मैं खुद उस आंदोलन का हिस्सा रहा हूँ। स्वर्गीय विपिन चंद्र त्रिपाठी जी के साथ जेल में दिन गुज़ारे हैं। हफ्तों, महीनों घर-परिवार से दूर रहा, सड़कों पर नारे लगाए, लाठियाँ खाईं, लेकिन उस वक्त मन में कोई दर्द नहीं था… क्योंकि एक सपना था अपने पहाड़ के लिए, अपनी मिट्टी के लिए।”

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें यकीन था कि जब उत्तराखंड बनेगा, तो हालात बदलेंगे। गांवों में रोजगार मिलेगा, बच्चे पलायन नहीं करेंगे, बुजुर्ग अपने आंगन में मुस्कुराएंगे। लेकिन आज का सच उन सपनों के विपरीत है। उन्होंने कहा, “आज जब देखता हूँ, तो मन सच में टूट जाता है। वो सपना जैसे धुंध में कहीं खो गया है। जिनके नाम पर हमने आंदोलन किए, आज उनकी याद में दीप तक नहीं जलते।”

माहरा ने श्री भंडारी के कदम को एक सार्थक चेतावनी बताते हुए कहा कि यह हम सबके लिए आईना है कि हम अपनी जड़ों से कितना दूर हो गए हैं। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया, “भाजपा सरकार ने राज्य के शहीदों को याद रखना छोड़ दिया है। उस सपने की आग को बुझाने की कोशिश की है, जो कभी हमारे सीने में जलती थी।”

अपने वक्तव्य का समापन करते हुए करन माहरा ने कहा, “आज मैं बस इतना ही कहना चाहता हूँ कि अगर हमें सच में अपने उत्तराखंड से प्यार है, तो शहीदों के सम्मान की लौ फिर जलानी होगी। हमें फिर से उस आत्मा को जगा देना होगा जो इस राज्य की असली पहचान है..संघर्ष, आत्मसम्मान और अपनेपन की भावना।”

उल्लेखनीय है कि इस घटना ने स्थानीय स्तर पर काफी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं और शहीदों के प्रति सम्मान व राज्य आंदोलन के मूल आदर्शों पर एक नई बहस छेड़ दी है।

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