राज्य के सभी स्कूलों में नियुक्त होंगे बाल अधिकार नोडल अधिकारी – डॉ गीता खन्ना

बाल दिवस पर उठाए गए महत्वपूर्ण कदम, ‘वंदे मातरम्’ के अनिवार्य गायन का भी सुझाव

टिहरी में एनसीपीसीआर की कार्यशाला आयोजित, बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने पर हुई चर्चा

देहरादून। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य के सभी स्कूलों में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि यह प्रस्ताव उत्तराखंड के गठन की 25वीं वर्षगांठ और किशोर न्याय अधिनियम के एक दशक पूरे होने के उपलक्ष्य में भेजा गया है।

इस प्रस्ताव में दो प्रमुख सिफारिशें शामिल हैं – प्रथम, राज्य के समस्त विद्यालयों में बच्चों के अधिकारों की सुदृढ़ सुरक्षा हेतु एक नोडल व्यक्ति की नियुक्ति की जाए, और द्वितीय, विद्यालयों में ‘वंदे मातरम्’ के अनिवार्य गायन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

डॉ. खन्ना ने बताया, “हमारा उद्देश्य है कि राज्य के प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और संरक्षित वातावरण मिले, जहाँ उनके अधिकारों का पूर्ण सम्मान हो।”

इसी क्रम में, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा आज टिहरी गढ़वाल में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। डॉ. गीता खन्ना ने इस कार्यक्रम में ऑनलाइन सम्मिलित होकर बच्चों के अधिकारों पर अपने विचार रखे। इस कार्यशाला में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने और संवेदनशीलता बढ़ाने से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

आयोग ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 15 नवम्बर को बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यशाला में शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, महिला एवं बाल विकास, श्रम विभाग सहित विभिन्न विभाग भाग लेंगे और अपने-अपने क्षेत्रों में बाल अधिकारों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रस्तुतिकरण देंगे।

20 नवम्बर को आयोग द्वारा एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समिति, प्रोबेशन विभाग, किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) सहित सभी संबंधित हितधारक भाग लेंगे। इस बैठक में सभी विभागों से पूर्व में आयोजित बैठकों की कार्रवाई रिपोर्ट और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

आयोग ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि उनका उद्देश्य राज्य के प्रत्येक बच्चे के अधिकारों, सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास के लिए सभी विभागों के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित करना है, ताकि उत्तराखंड को एक आदर्श बाल-हितैषी राज्य के रूप में विकसित किया जा सके।

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