शिव रहस्य: क्या है उनका असल रूप और क्यों पूजते हैं शिवलिंग?

शिव या महादेव सनातन संस्कृति में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। इन्हें देवों के देव महादेव भी कहते हैं। भगवान शिव एक ऐसा विषय है जिसे जितना जानें कम है क्योंकि महादेव को जानना या समझना एक आम इंसान के बस की बात नहीं उसे जानने के लिए हमें अपनी बुद्धि के स्तर को बढ़ाना होगा इसलिए सबसे पहले हमें शिव को जानना होगा?

शिव कौन हैं?

शिव कोई व्यक्ति नहीं है, शिव एक तत्व है। वह तत्व जिससे सब कुछ चल रहा है। शिव तत्व इस ब्रह्मांड का सार है। जिस प्रकार पृथ्वी, अग्नि, जल और वायु सभी तत्व आकाश तत्व में विद्यमान होते हैं, ठीक उसी प्रकार शिव तत्व संपूर्ण ब्रह्मांड का सार है। इसीलिए शिव को नीले रंग में दर्शाया गया है, जो अनुभव की गहराई को दर्शाता है जिसे एक अबोध बालक भी समझ सकता है।

शिव का स्वरुप कैसा है?

शिव का कोई रूप नहीं है, इसीलिए हर जगह शिव की ‘मूर्ति’ की पूजा नहीं की जाती; इसके बजाय, ‘शिवलिंग’ की पूजा की जाती है। शिव को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में न सोचें जो 15,000 वर्ष पहले कहीं बैठे ध्यान में लीन थे। शिव तत्व का दिव्य सार मानवीय समझ से परे है और इसीलिए इसे एक अमूर्त रूप दिया गया है। ‘शिवलिंग’ की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि यह शिव के निराकार स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है। जहां वाणी और मन प्रवेश नहीं कर पाता; वही तत्व शिव तत्व है। ध्यान करने से शिव तत्व की अनुभूति होती है।

शिव और प्रकृति का क्या संबंध है?

कहते हैं शिव (पुरुष) का विवाह शक्ति अर्थात प्रकृति से हुआ है माने यह समस्त प्रकृति शिवतत्व में ही है। शिवतत्व को पहचानने से प्रकृति के अन्य तत्वों को समझा जा सकता है। प्रकृति में कुल 36 तत्व बताये जाते हैं, जिसमें पहला तत्व है पृथ्वी और 36वां तत्व है शिव तत्व। शिव तत्व ब्रह्मांड की हर वस्तु में व्याप्त है।

शिव के प्रतीकों का गूढ़ अर्थ क्या है?

स्वयं को समझना शिव तत्व को जानने के समान है। शिव के मस्तक पर अर्धचंद्र, हमारे मन के एक अंश का प्रतिनिधित्व करता है, जिसके भीतर ज्ञान की संभावना होती है। शिव के गले में सर्प, सतर्कता और जागरूकता का प्रतीक है। आप या तो जाग्रत अवस्था में होते हैं या गहरी नींद में। जागृत, निद्रा और स्वप्नावस्था के मध्य चेतना की चौथी अवस्था, तुरीय अवस्था कहलाती है। वही शिव तत्व है। यह आत्म-सजगता की स्थिति है।

शिव के गले में पड़ा हुआ सर्प सोता हुआ प्रतीत होने पर भी भीतर से सजग और जागृत रहने का प्रतीक है। यह एक सतत प्रयास है। समझने से, ध्यान में रखने से, जागरूकता बनाए रखने से इस अवस्था की थोड़ी सी झलक मिलती है। इसके अंशमात्र को जान लेने से आत्मबोध हो जाता है।

शिव के हाथों में त्रिशूल, तीनों गुणों – सत्व, रजस और तमस का प्रतिनिधित्व करता है। शिव तत्व इन तीनों गुणों से परे है। डमरू ‘नाद’ का प्रतिनिधित्व करता है। इस प्रकार ढोल की ध्वनि आकाश तत्व का प्रतीक है। सिर से बहती हुई गंगा, मानव चेतना में संचित विविध ज्ञान का प्रतिनिधित्व करती है।

किसी ने कितना भी ज्ञान अर्जित कर लिया हो लेकिन संपूर्ण ज्ञान को समझ पाना चुनौतीपूर्ण है। शिव तत्व वह है जो इस गहन समझ की हल्की सी झलक देता है।

इस प्रकार, डमरू ध्वनि का प्रतीक है और ध्वनि की गुणवत्ता आकाश का प्रतीक है। लेकिन यह सब कुछ अनुभव कर पाना असंभव है। शिव के ब्रह्मांडीय नृत्य, सर्प तथा चंद्रमा का प्रतीकवाद एक साथ मिलकर संस्कृति में अंतर्निहित गहन ज्ञान को व्यक्त करते हैं। शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप शक्ति और शिव के मिलन का प्रतीक है।

लिंग स्थापित करना आकाश से संबंध का प्रतीक है। कोई भी व्यक्ति बाह्य रूप से आकाश से संबंधित नहीं हो सकता। केवल वही व्यक्ति ऐसा कर सकता है जिसने भीतर से इसका अनुभव किया हो। तो इसलिए एक पत्थर, एक लिंग शिव तत्त्व का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करता है। पत्थर उस तत्त्व का एक सांकेतिक प्रतीक है, जो संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है। शिव सर्वव्यापी हैं। इस प्रकार हमारे पूर्वजों ने चेतना को प्रतीकों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है।

लोग शिव की आराधना के लिए कुछ विशेष स्थानों पर क्यों जाते हैं?

ज्योतिर्लिंग शब्द का तात्पर्य है, प्रकाश स्वरूप। वहां जाकर बैठने से व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति और ऊर्जा का अनुभव कर सकता है। 12 ज्योतिर्लिंगों जैसे प्रतीक लोगों को उन स्थानों पर स्वयं की तथा चेतना की ऊर्जा अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

साधु-संतों ने कुछ विशिष्ट स्थानों (जैसे ज्योतिर्लिंग, मंदिर आदि स्थान) पर दिव्य उपस्थिति की स्थापना (प्राण प्रतिष्ठा) की है। जहां दैवीय ऊर्जा अधिक है, वहां गहन ध्यान अनुभव करने में सहायता मिलती है और व्यक्ति की चेतना शक्ति में वृद्धि होती है।

लेखक श्री श्री रवि शंकर

श्री श्री रविशंकर को मानवातावदी और आध्यात्मिक गुरु के तौर पर वैश्विक स्तर पर पहचाना जाता है। मानव मूल्यों को बढ़ाकर, हिंसा और तनाव मुक्त समाज स्थापित करने से संबंधित इनके दृष्टिकोण ने सैकड़ों लोगों को अपने उत्तरदायित्वों को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। निश्चित रूप से यह विश्व की बेहतरी के लिए एक बड़ा कदम साबित हुआ।

(साभार)

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