उपनल कर्मियों के धरने में पहुंचे हरक सिंह रावत, बोले– “नियमितीकरण में देरी अब बर्दाश्त नहीं, सरकार तुरंत फैसला ले”

देहरादून। परेड ग्राउंड के समीप उपनल कर्मियों के आंदोलन को सोमवार को उस समय नया बल मिला, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग का समर्थन करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। रावत ने कहा कि सैनिक कल्याण मंत्री रहते हुए उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण हेतु कैबिनेट में प्रस्ताव रखने के लिए समिति गठित करवाई थी, लेकिन सरकार के स्तर पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के अधिकांश विभाग उपनल कर्मियों की मेहनत और योग्यता के भरोसे चल रहे हैं, न कि नियमित कर्मचारियों के। रावत ने सवाल उठाया कि जबकि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही कर्मचारियों के पक्ष में स्पष्ट फैसला दे चुके हैं, तो फिर सरकार किस आधार पर नियमितीकरण में देरी कर रही है।

मुख्यमंत्री धामी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर एक युवा मुख्यमंत्री भी राज्य के युवाओं और वर्षों से सेवाएं दे रहे उपनल कर्मियों के हित में निर्णय नहीं ले पा रहा, तो यह अत्यंत चिंता की बात है। उन्होंने बताया कि कई उपनल कर्मचारी पिछले 15 वर्षों से विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें स्थायी नियुक्ति नहीं मिल सकी है। रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर धामी और सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी दोनों उनके छोटे भाइयों समान हैं, इसलिए वह व्यक्तिगत रूप से भी उनसे निवेदन कर रहे हैं कि वे इन कर्मचारियों के हित में त्वरित निर्णय लें, अन्यथा यह संघर्ष और बड़ा रूप ले सकता है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी उपनल कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ी है और भविष्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर इन कर्मचारियों को न्याय अवश्य दिलाया जाएगा। रावत ने भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों से अनशन खत्म करने की अपील की और उन्हें खुद जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।

इधर, उपनल कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद गोदियाल ने बताया कि 10 नवंबर से जारी यह आंदोलन कर्मचारियों की जायज मांगों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि साथी कर्मचारी नीलम डोभाल के निधन ने सभी को गहरा आघात पहुंचाया है, और अब तक किसी भी मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी ने संवेदना जताने तक की ज़हमत नहीं उठाई।

उधर, हड़ताल का असर सरकारी दफ्तरों में साफ दिख रहा है। मेडिकल कॉलेजों में कामकाज प्रभावित है, कई विभागों में डाटा एंट्री का कार्य ठप है तथा अधिकारियों के वाहनों के लिए ड्राइवर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि उपनल से जुड़े चालक भी हड़ताल में शामिल हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती, तो उनके परिवारजन भी आंदोलन में शामिल होकर संघर्ष को और तेज करेंगे।

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