
नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्र सरकार को अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। एसकेएम ने कहा है कि यदि सरकार इस समझौते पर हस्ताक्षर करती है तो देशभर के किसान अगले ही दिन बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद जारी प्रेस नोट में एसकेएम ने किसानों से संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक एमएसपी को सी-2+50 प्रतिशत के फार्मूले पर कानूनी गारंटी नहीं मिलती, सभी मुक्त व्यापार समझौते रद्द नहीं होते और किसानों का कर्ज माफ नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
एसकेएम ने 10 अगस्त 2026 को देशव्यापी विरोध दिवस मनाने का ऐलान किया है। इस दौरान रेल रोको, रास्ता रोको और जेल भरो जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा 28 जुलाई को नई दिल्ली में अखिल भारतीय सम्मेलन और 29 जुलाई को तालकटोरा स्टेडियम में मजदूर-किसान राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की भी भागीदारी रहेगी।
बैठक में सरकार की कृषि नीतियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया गया कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए नीतियां बनाई जा रही हैं। एसकेएम ने बढ़ती महंगाई, खाद-डीजल और गैस की कीमतों, ग्रामीण रोजगार, मजदूरी और जल संकट जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
संगठन ने किसानों, मजदूरों, युवाओं और छात्रों से एकजुट होकर जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। साथ ही विभिन्न राज्यों में चल रहे किसान और सामाजिक आंदोलनों को समर्थन देने की भी घोषणा की गई है।
हन्नान मोल्लाह, सत्यवान, राजन क्षीरसागर, डॉ. दर्शन पाल, डॉ. सुनीलम, डॉ. आशीष मित्तल और प्रेम सिंह गहलावत की अध्यक्षता वाली समिति ने बैठक का संचालन किया, जबकि रमिंदर सिंह पटियाला ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और पी. कृष्णप्रसाद ने समापन भाषण दिया।

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