देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने बिजली संचालन से जुड़ी पुरानी जटिलताओं को दूर करने की दिशा में बड़ा तकनीकी कदम बढ़ाया है। आईआईटी के विशेषज्ञों की मदद से निगम ने एक ऐसा उन्नत लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है, जो बिजली की खपत और उपलब्धता का वास्तविक समय में बेहद सटीक आकलन करेगा। इस प्रणाली के शुरू होने से यूपीसीएल को हर साल मांग में उतार-चढ़ाव के कारण लगने वाले भारी पेनाल्टी शुल्क से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अब तक राज्य में बिजली की आमद-रफ्त के संतुलन, दैनिक मांग का पूर्वानुमान, ऊर्जा खरीद की योजना और नेशनल ग्रिड से मिलने वाली सप्लाई की निगरानी—ये सभी प्रक्रियाएं पुराने ढर्रे पर चलती थीं। इन पारंपरिक तरीकों में ज़रा-सी चूक भी बिजली की कमी या अधिक खपत जैसी स्थितियां पैदा कर देती थी, जिसका नतीजा निगम पर आर्थिक बोझ और उपभोक्ताओं पर परोक्ष असर के रूप में सामने आता था।
इसी चुनौती का समाधान खोजते हुए यूपीसीएल ने आईआईटी के तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से ऑटोमैटिक डिमांड रिस्पांस सिस्टम (ADRS) तैयार किया है। यह हाई-टेक सॉफ्टवेयर उन सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं से लाइव डेटा प्राप्त करता है, जहां से बिजली राज्य में प्रवेश करती है या बाहर भेजी जाती है। सिस्टम पर दिखने वाला रियल-टाइम ग्राफिकल इंटरफेस बिजली की मांग, उपलब्धता और प्रवाह का स्पष्ट व त्वरित विश्लेषण उपलब्ध कराता है।
परियोजना निदेशक अजय अग्रवाल ने बताया कि नई तकनीक के चलते यदि अचानक किसी समय डिमांड बढ़ती है तो मुख्यालय से तुरंत सप्लाई को नियंत्रित किया जा सकेगा। आवश्यकतानुसार चुनिंदा क्षेत्रों में कुछ समय के लिए लोड सीमित कर बिजली संतुलन बनाया रखा जा सकेगा, जिससे महंगी पेनाल्टी से बचाव संभव होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की उन्नत रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली अपनाने वाला यूपीसीएल देश का पहला विद्युत निगम बन गया है, जो स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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