हरिद्वार। उत्तराखंड की राजनीति को नई दिशा देने वाले वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के प्रमुख चेहरे पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट का आज हरिद्वार स्थित अपने आवास ‘तरुण हिमालय’ पर निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर ने पूरे राज्य को शोक की लहर में डुबो दिया है। राजनीतिक दलों से लेकर सामाजिक संगठनों तक ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है।
दिवाकर भट्ट लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। पिछले दस दिनों से देहरादून के इंद्रेश महंत अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताते हुए कल ही परिजनों को सूचित कर दिया था कि अब कोई सुधार की संभावना नहीं है। इसके बाद परिजनों ने उन्हें डिस्चार्ज कराकर हरिद्वार ले आये, जहां आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
दिवाकर भट्ट उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्हें ‘फील्ड मार्शल’ के नाम से जाना जाता था, जो उनके अथक संघर्ष और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक था। 1970-80 के दशक में उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकारों, अलग राज्य की मांग और क्षेत्रीय स्वाभिमान के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन का नेतृत्व किया। UKD की स्थापना से जुड़े होने के कारण वे पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष भी रहे। 1999 से 2003 तक उन्होंने UKD की कमान संभाली और राज्य गठन के बाद भी क्षेत्रीय मुद्दों जैसे पलायन, कृषि संकट और पर्यावरण संरक्षण पर मुखर रहे।
राजनीतिक सफर में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे। 2002 और 2007 में वे देवप्रयाग विधानसभा सीट से UKD के टिकट पर चुनाव लड़े, जिसमें 2007 में उन्हें सफलता मिली। 2007-2012 तक वे विधायक रहे और एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में सेवा दी। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन 2017 में UKD में वापसी की। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने देवप्रयाग से UKD के टिकट पर चुनाव लड़ा, हालांकि हार का सामना करना पड़ा। उनकी आयु उस समय 76 वर्ष थी।
उनके निधन पर राजनीतिक दलों ने शोक व्यक्त किया है। UKD ने उन्हें ‘राज्य आंदोलन का विमोचनकर्ता’ बताते हुए कहा कि उनका जाना पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट कर कहा, “वरिष्ठ नेता दिवाकर भट्ट जी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति दें।”
परिजनों के अनुसार, दिवाकर भट्ट का पार्थिव शरीर हरिद्वार में ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।दिवाकर भट्ट का निधन न केवल UKD के लिए, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए एक बड़ा नुकसान है। वे हमेशा क्षेत्रीय राजनीति के प्रतीक के रूप में याद किए जाएंगे। उनके संघर्ष की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।

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