गांधी शताब्दी में प्रदेश का पहला चाइल्ड-फ्रेंडली टीकाकरण कक्ष भी शुरू
देहरादून । मुख्यमंत्री की प्रेरणा और जिलाधिकारी सविन बंसल के व्यक्तिगत हस्तक्षेप व निरंतर निगरानी से देहरादून का जिला चिकित्सालय अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मात्र एक वर्ष में मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं ने जो रफ्तार पकड़ी है, वह पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन रही है। सबसे बड़ी उपलब्धि स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) की है, जिसे पिछले साल 12 नवंबर 2024 को सिर्फ 6 बेड के साथ शुरू किया गया था, आज दोगुनी क्षमता के साथ दो अलग-अलग वार्ड में संचालित हो रहा है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस इस यूनिट में अब दो मदर वार्ड, अलग स्टाफ रूम और पूरे परिसर में सीसीटीवी की 24×7 निगरानी की व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी सविन बंसल खुद नियमित रूप से एसएनसीयू का दौरा करते हैं, सीएमओ व चिकित्सकों से फीडबैक लेते हैं और तत्काल सुधार के निर्देश देते हैं। उनके इस सक्रिय हस्तक्षेप का नतीजा यह है कि एसएनसीयू में अब तक कुल 491 नवजात शिशुओं का सफलतापूर्वक इलाज हो चुका है। इनमें से शुरूआती दौर (नवंबर-दिसंबर 2024) में 51 और 1 जनवरी 2025 से अब तक 440 नवजातों को उच्चस्तरीय देखभाल मिली है।

गंभीर हालत वाले नवजातों के लिए जिलाधिकारी ने एक डेडिकेटेड एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की है। इसी सप्ताह दो नवजातों को हृदय संबंधी जांच (ईको) के लिए कोरोनेशन अस्पताल रेफर किया गया और समय पर उच्च स्तरीय इलाज सुनिश्चित हुआ। चिकित्सकों के अनुसार, एसएनसीयू में शत-प्रतिशत रिकवरी रेट के साथ नवजात मृत्यु दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।वहीं, जिला चिकित्सालय परिसर में आधुनिक ब्लड बैंक का निर्माण भी युद्धस्तर पर चल रहा है, जिसे बहुत शीघ्र जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। इससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को तुरंत ब्लड उपलब्ध हो सकेगा।
गांधी शताब्दी नेत्र अस्पताल परिसर में उत्तराखंड का पहला आधुनिक एवं बच्चों के अनुकूल टीकाकरण कक्ष शुरू हो चुका है। यह कक्ष अब सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक (12 घंटे) खुला रहता है। कामकाजी माता-पिता के लिए यह वरदान साबित हो रहा है। रंग-बिरंगे कार्टून, खिलौने और हल्का-फुल्का माहौल होने से बच्चे अब इंजेक्शन लगवाते समय रोते नहीं, बल्कि खुशी-खुशी टीका लगवाने आते हैं। प्रतीक्षा समय में भारी कमी आई है और टीकाकरण कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा, “मुख्यमंत्री जी का स्पष्ट निर्देश है कि एक भी नवजात या बच्चा इलाज के अभाव में दम न तोड़े। हम उसी दिशा में दिन-रात काम कर रहे हैं। आने वाले दिनों में और कई नई सुविधाएं जनता को समर्पित की जाएंगी।”

जिला प्रशासन के इन प्रयासों से जहां एक ओर मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है, वहीं आम जनता का सरकारी अस्पतालों पर भरोसा भी तेजी से बढ़ा है। देहरादून अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश का मॉडल जिला बनता दिख रहा है।

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