उत्तराखंड में किसान एकता का महासम्मेलन : न्यायमूर्ति टंडन ने सरकार से की किसानों के उत्पीड़न बंद करने की मांग

देहरादून, 14 दिसंबर। भारतीय किसान यूनियन एकता शक्ति उत्तराखंड के दूसरे किसान सम्मेलन एवं अभिनंदन समारोह में परेड ग्राउंड के उज्ज्वल रेस्टोरेंट में जोरदार उत्साह के साथ संपन्न हुआ। सैंकड़ों किसानों ने एकजुट होकर अपनी मांगें बुलंद कीं।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति राजेश टंडन ने दीप प्रज्ज्वलन से किया। नूपुर बडोला के सरस्वती वंदना से शुरू हुए आयोजन में सर्वसम्मति से पर्वतीय मैदानी एकता मंच को पूर्ण समर्थन देने का प्रस्ताव पारित हुआ। प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र दत्त शर्मा की अध्यक्षता में चले इस कार्यक्रम का संचालन मीडिया प्रभारी राकेश मिश्रा ने कुशलतापूर्वक किया।

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति टंडन ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा, “किसान आज विकट परिस्थितियों से जूझ रहा है। उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, गन्ने का भुगतान समय पर नहीं हो रहा। सरकार किसानों का उत्पीड़न बंद करे। अन्नदाता परेशान हो तो देश कैसे चलेगा?” उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र दत्त शर्मा को सफल आयोजन के लिए आभार जताया।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन यादव ने चिंता जताई कि खाद के दाम आसमान छू रहे हैं, कृषि यंत्र महंगे हो गए हैं। “सरकार शोषण रोके, किसान आंदोलन नहीं चाहता, खेती ही हमारा जीवन है।” राष्ट्रीय संगठन महासचिव अक्षित शर्मा, युवा मोर्चा अध्यक्ष उदयवीर सिंह, महासचिव नितिन गौड, प्रदेश संगठन महामंत्री देवेंद्र यादव समेत कई वक्ताओं ने उत्तराखंड के किसानों की समस्याओं पर रोशनी डाली। अन्य वक्ता रहे जिला अध्यक्ष गाजियाबाद रामवीर शर्मा, पूर्व पार्षद अशोक वर्मा और पूर्व भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष जोगिंदर पुंडीर।

सभी अतिथियों का माल्यार्पण और शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया। विशेष रूप से सुमित सिंघल को युवा मोर्चा उत्तराखंड का प्रदेश अध्यक्ष तथा प्रभा शर्मा को महिला मोर्चा का प्रदेश महामंत्री घोषित किया गया।

कार्यक्रम की सफलता में तरनजीत चड्ढा, अकबर सिद्दिकी, जितेंद्र सेमवाल, जान मोहम्मद, साजिद, गौतम पंडित, रियासत, डोनिश, नदीमुल इस्लाम, पूजा राजपूत, एनके गुप्ता, वसीम गुड्डू, संदीप गोस्वामी, गजेंद्र साहनी, मुकेश साहनी, बाबूराम गुप्ता, जावेद, अमरसिंह यादव, रामपाल भारती, अनिल कुमार, जाहिद अली, शौवेज खान, मुदस्सिर और छत्रपाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

किसान संगठन ने सरकार से तत्काल राहत की मांग की है, जो राज्य की कृषि नीतियों पर बहस छेड़ सकता है।

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