नेशनल हेराल्ड मामला: कांग्रेस बोली—‘सत्य की जीत’

देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप सिंह ने नेशनल हेराल्ड-यंग इंडियन मामले में न्यायालय के नवीनतम फैसले को “सत्य की ऐतिहासिक जीत” बताते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को अवैध, दुर्भावनापूर्ण और क्षेत्राधिकार से बाहर करार देकर सरकार की “बदनीयत और गैरकानूनी” मंशा को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।

धीरेंद्र प्रताप ने एक प्रेस वक्तव्य में कहा, “न्यायालय के इस स्पष्ट फैसले ने साबित कर दिया है कि यह पूरा मामला भाजपा सरकार द्वारा बदले की भावना से उठाया गया एक कृत्रिम और निराधार मुकदमा था। अदालत ने माना है कि ईडी का हस्तक्षेप इस मामले में कानूनी दायरे से बाहर था और उसके पास कोई प्राथमिकी (एफआईआर) भी नहीं थी, जो साबित करता है कि यह मामला शुरू से ही खोखला था।”

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक से मोदी सरकार अपनी एजेंसियों का इस्तेमाल करके मुख्य विपक्षी दल और उसके नेतृत्व – श्रीमती सोनिया गांधी और श्री राहुल गांधी – के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध और द्वेष की भावना से लगातार कार्रवाई करती रही है, जो अब सबके सामने है। उन्होंने कहा, “यह फैसला साफ कर देता है कि यह एक निम्नस्तरीय राजनीतिक षड्यंत्र था, जिसका उद्देश्य कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था।”

धीरेंद्र प्रताप ने जोर देकर कहा, “इस पूरे प्रकरण में मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला नहीं बनता, क्योंकि न तो कोई अपराधिक आय थी, न ही किसी संपत्ति का अवैध हस्तांतरण हुआ था। ये सारे आरोप द्वेष और सम्मान पर हमला करने की मंशा से गढ़े गए थे, जो आज अदालत के सामने धराशायी हो गए हैं।”

अपने बयान के अंत में कांग्रेस नेता ने दावा किया कि यह फैसला पार्टी के संघर्ष और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी और उसका नेतृत्व सदैव सत्य, लोकतंत्र, न्याय और हर भारतीय के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। कोई भी ताकत हमें इस रास्ते से डिगा नहीं सकती। हम डरने वालों में से नहीं हैं, क्योंकि हमारा संघर्ष जनता के हक और सच्चाई के लिए है।”

बतातें चलें कि नेशनल हेराल्ड अखबार के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में ईडी द्वारा दायर एक आरोप पत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को आरोपी बनाया गया था। अदालत ने कहा था कि ईडी के पास मामले में हस्तक्षेप करने का पर्याप्त क्षेत्राधिकार नहीं था। इस फैसले को कांग्रेस ने एक बड़ी नैतिक जीत के रूप में पेश किया है, जबकि भाजपा की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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