“4000 से अधिक स्कूल बंद” की खबर भ्रामक – शिक्षा विभाग

छात्र हित सर्वोपरि: कम नामांकन वाले 12 विद्यालयों को पुनः खोला गया

देहरादून ।उत्तराखंड में विद्यालय बंदी को लेकर राष्ट्रीय स्तर के एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित “प्रदेश में 4000 से अधिक स्कूल बंद” शीर्षक की खबर पर शिक्षा विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए इसे भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। विभाग की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि राज्य में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत यदि किसी भी विद्यालय में एक भी छात्र अध्ययनरत है, तो वह विद्यालय बंद नहीं किया जा सकता।

कहा गया है कि पूर्व में कम नामांकन वाले कुछ विद्यालयों का युक्तिकरण (रैशनलाइजेशन) अवश्य किया गया था, परंतु किसी भी छात्र की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी गई। जहां भी आवश्यकता पड़ी, वहां संबंधित विद्यालयों को राज्य सरकार द्वारा पुनः प्रारंभ किया गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण गढ़वाल मंडल के विभिन्न विकासखंडों में पुनः खोले गए विद्यालय हैं, जिन्हें छात्र संख्या के आधार पर फिर से संचालित किया गया।
शिक्षा विभाग द्वारा जिन 12 विद्यालयों को दोबारा खोला गया है, उनमें पौड़ी जनपद का राजकीय प्राथमिक विद्यालय तल्ली, पोड़ीखाल का राजकीय प्राथमिक विद्यालय सेडियाखाल, एकेश्वर क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मारों मरैटा व पवैली, धारीखाल का जवाद, थलीसैंण का खांड तलसा, नैनीडांडा का उख्टा, बीरोंखाल के दुनाड़ व बंगार, कोट विकासखंड का देहलचौरी, पाबौ का समलेड़ी तथा कल्जीखाल क्षेत्र का फल्यां विद्यालय शामिल हैं।

यह भी बताया गया है कि जिन विद्यालयों में वर्तमान में शिक्षक तैनात नहीं हैं, वहां नजदीकी विद्यालयों से शिक्षकों की कार्ययोजना के तहत व्यवस्था कर बच्चों को नियमित शिक्षा दी जा रही है, जिससे किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो। शिक्षा विभाग ने दो टूक शब्दों में कहा है कि विभाग का उद्देश्य विद्यालय बंद करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। छात्र संख्या बढ़ाने के लिए नवाचार, आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

 समग्र शिक्षा उत्तराखंड के अपर राज्य परियोजना निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकता “हर बच्चे तक स्कूल” और “हर बच्चे को बेहतर शिक्षा” सुनिश्चित करना है।    यह भी स्पष्ट किया गया है कि बच्चों के हितों की रक्षा के लिए शिक्षा विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है और प्रदेश में स्कूलों को लेकर फैल रही अफवाहों से अभिभावकों व आमजन को भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है।

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