58 घंटे के टंकी आंदोलन के बाद प्रशासन का प्रस्ताव, नर्सिंग कर्मियों ने दी एक माह की मोहलत

भूख, प्यास, तनाव झेल नर्सिंग कर्मी डटे रहे, प्रस्ताव मिलने पर उतरे

देहरादून। नर्सिंग एकता मंच उत्तराखंड के बेरोजगार नर्सिंग कर्मियों का आंदोलन आज 160वें दिन प्रवेश कर गया है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे इन कर्मियों का आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया, जब 11 मार्च को सुबह लगभग 5 बजे महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, कविता पुंडीर, धर्मेंद्र, विनोद और आनंद पाल अपनी मांगों को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गए। मौसम, भूख, थकान और लगातार बढ़ते तनाव के बावजूद आंदोलनकारी वहां डटे रहे और हिम्मत नहीं हारी।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार वार्ता के प्रयास किए जाते रहे, और अंततः 13 मार्च को दोपहर लगभग 3:20 बजे एसपी सिटी एवं डीजी हेल्थ की ओर से आंदोलनकारियों के लिए प्रस्ताव भेजा गया। प्रस्ताव मिलने के बाद आंदोलनकारियों ने इसे सकारात्मक पहल मानते हुए वार्ता के लिए सहमति दी और शाम 3:50 बजे पानी की टंकी से नीचे उतर आए। इस तरह 11 मार्च सुबह 5 बजे से लेकर 13 मार्च शाम 3:50 बजे तक आंदोलनकारी साथी लगभग 58 घंटे 50 मिनट तक पानी की टंकी पर डटे रहे, जिसके दौरान कई साथियों की तबीयत बिगड़ गई और स्थिति लगातार गंभीर बनी रही।

टंकी से नीचे उतरने के तुरंत बाद आंदोलनकारी साथियों को स्वास्थ्य परीक्षण एवं मेडिकल जांच के लिए कोरोनेशन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार किया गया। इसी बीच धरना स्थल पर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी पहुंचे और उन्होंने आंदोलनरत नर्सिंग कर्मियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा उनके संघर्ष को समर्थन देने की बात कही। उन्होंने सरकार से जल्द सकारात्मक समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं की मांगों को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

इसके बाद सभी नर्सिंग कर्मी परेड ग्राउंड से अपना धरना समाप्त कर एकता विहार स्थित धरना स्थल पहुंचे। आंदोलनकारियों ने सरकार को अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई के लिए एक महीने का समय दिया है। नर्सिंग एकता मंच का कहना है कि यदि तय समय सीमा के भीतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगे की रणनीति तैयार कर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। आंदोलनकारी नर्सिंग कर्मियों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष रोजगार, सम्मान और न्याय की लड़ाई है, जिसे वे पूरी एकजुटता और शांतिपूर्ण तरीके से आगे भी जारी रखेंगे।

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