अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘वीआईपी’ को बचाने का आरोप: करन माहरा का धामी सरकार पर निशाना

देहरादून/सल्ट। उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्लूसी) के सदस्य करन माहरा ने आज सल्ट विधानसभा क्षेत्र में महिलाशक्ति, युवासाथियों और देवतुल्य जनता जनार्दन के साथ मिलकर अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए एक विशाल और भावनात्मक न्याय यात्रा में भाग लिया। इस यात्रा को प्रदेश की जनता के धैर्य के टूटने और सरकार के प्रति गहरे अविश्वास का प्रतीक बताया गया है। माहरा ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि हर कदम और हर नारा इस बात का गवाह है कि उत्तराखंड की जनता अब आधे-अधूरे न्याय और लीपापोती को स्वीकार नहीं करेगी।

माहरा ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि आज भी यह स्पष्ट नहीं है कि वह ‘वीआईपी’ कौन है, जिसे बचाने के लिए एक बेटी को आज तक पूरा न्याय नहीं मिल पाया। उन्होंने भाजपा के पूर्व विधायक एवं मंत्री के वायरल ऑडियो का उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर वीआईपी के नाम का खुलासा किया जा रहा है। यह ऑडियो सरकार के सामने है, फिर भी पुष्कर सिंह धामी की सरकार आंखों पर पट्टी बांधकर क्यों बैठी है ? माहरा ने सवाल किया कि क्या यह चुप्पी किसी मजबूरी का परिणाम है या सत्ता के संरक्षण की सच्चाई?

सरकार को चेताते हुए माहरा ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक बेटी की निर्मम हत्या के बाद भी सरकार निष्पक्ष सीबीआई जांच से बचने का हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने बुलडोज़र चलाकर सबूत मिटाने के आरोप, प्रशासनिक अधिकारियों के बदलते बयान और अब वायरल ऑडियो जैसे घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए। अगर सरकार के पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो सीबीआई जांच से डर कैसा? उन्होंने पूछा।

माहरा ने इस मामले को केवल अंकिता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था की साख और राज्य के मूल उद्देश्य का प्रश्न बताया। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसलिए उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ था कि सत्ता और रसूख़ के आगे न्याय को कुचल दिया जाए? क्या इसलिए आंदोलनकारियों ने बलिदान दिए थे कि गरीब और सामान्य परिवार की बेटियों की आवाज़ को दबा दिया जाए?

कांग्रेस पार्टी और प्रदेश की जनता की ओर से माहरा ने स्पष्ट मांग की कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की तत्काल निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जाए, वीआईपी का नाम सार्वजनिक किया जाए और दोषियों को किसी भी राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए। उन्होंने कहा कि जब तक अंकिता को पूरा न्याय नहीं मिलता, तब तक हमारा संघर्ष सड़क से सदन तक जारी रहेगा। यह लड़ाई सत्ता के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ है और इसमें उत्तराखंड की जनता अंत तक डटी रहेगी।

इस अवसर पर सल्ट विधानसभा की महिलाएं, युवा और बुज़ुर्ग हर वर्ग के लोग अंकिता भंडारी के लिए न्याय यात्रा का हिस्सा बने। इस यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जो सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता के गुस्से को दर्शाता है।माहरा ने अपने बयान में प्रदेश की जनता को एकजुट होने की अपील की और कहा कि यह यात्रा न्याय की लड़ाई का प्रतीक है।

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