होनहार बेटियों के ‘सारथी’ बने DM सविन: अब अभाव नहीं रोक पाएंगे शिक्षा की उड़ान

देहरादून। जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’ के तहत दो होनहार बेटियों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई है, जिससे उनके सपने साकार होने का रास्ता प्रशस्त हो गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में यह पहल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में बेटियों की शिक्षा को नया जीवन देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह उद्यम न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करता है, बल्कि विषम परिस्थितियों से जूझ रहे परिवारों के लिए आशा की किरण भी है, जहाँ बेटियों की शिक्षा को बाधित होने से रोका जा रहा है।

जीविका अंथवाल, जो बी.कॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं, अपने पिता के गंभीर लीवर रोग के कारण आईसीयू में कई महीनों से भर्ती हैं। परिवार की पूरी जिम्मेदारी माता के कंधों पर है, जो सीमित संसाधनों में घर चला रही हैं। शिक्षा के लिए आवश्यक लैपटॉप और आर्थिक सहायता के लिए जीविका की माता ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया। इस पारिवारिक स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने सीएसआर फंड से जीविका के बैंक खाते में 1 लाख रुपये हस्तांतरित किए हैं। साथ ही, राइफल फंड से लैपटॉप उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि उनकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके। जिलाधिकारी सविन बंसल ने अपेक्षा व्यक्त की कि यह धनराशि पूर्णतः शिक्षा में लगेगी, और उन्होंने उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार और जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित टीम को सराहना दी। उन्होंने कहा, “परिस्थितियों की मार झेल रहे परिवारों की होनहार बेटियों की शिक्षा को जीवित रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” बेटियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “अपने हौसले और आत्मविश्वास को बनाए रखें, शिक्षा की ‘स्पार्क’ को कभी बुझने न दें और अपने निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति हेतु निरंतर आगे बढ़ती रहें।”

नन्दिनी राजपूत कक्षा 11 की छात्रा हैं, जो नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनना चाहती हैं। वर्ष 2018 में उनके पिता का निधन हो चुका है, और माता आंगनवाड़ी कार्यकर्ती होने के साथ पार्ट-टाइम सिलाई कर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। नन्दिनी सहित उनकी तीन बेटियाँ कक्षा 12, 11 और 6 में अध्ययनरत हैं। आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने नन्दिनी के बैंक खाते में भी सीएसआर फंड से 1 लाख रुपये की सहायता प्रदान की है, जिससे उनकी शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रह सके। यह पहल प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’ के माध्यम से पिछले सप्ताह पुनर्जीवित की गई थी, जो अभी तक 90 बेटियों की शिक्षा को राहत प्रदान कर चुका है, कुल 32 लाख रुपये की सहायता के साथ।

प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’ जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा शुरू किया गया है, जो अभावग्रस्त, अनाथ और दुर्बल बेटियों की उच्च शिक्षा, पोस्ट-ग्रेजुएशन और स्किल डेवलपमेंट को समर्थन देता है। यह योजना मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे ‘प्रोजेक्ट उत्कर्ष’ से जुड़ी है, जो बेटियों को स्वावलंबी बनाने पर फोकस करती है। एक बहु-क्षेत्रीय समिति द्वारा चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि फंड निष्पक्ष रूप से लागू हो। इसके तहत, जनवरी 2026 में पहले दिन ही 4 बेटियों को 1.55 लाख रुपये की सहायता दी गई, जबकि नवंबर 2025 में 32 बेटियों को 13 लाख रुपये की राशि वितरित की गई। यह पहल न केवल शिक्षा को पुनर्जीवित करती है, बल्कि देहरादून जैसे क्षेत्रों में बेटियों के लिए अवसरों को बढ़ावा देती है, जहाँ सीएसआर फंड का उपयोग शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में हो रहा है।

सीएसआर फंड का उद्देश्य पात्र और जरूरतमंदों के कल्याण में लगाना है, और यह देहरादून में बेटियों की शिक्षा को समर्थन देने के लिए एक प्रभावी उपकरण है। जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि यह धनराशि केवल पढ़ाई में लगेगी, और उन्होंने अभिभावकों को भी उपस्थित रहने का आह्वान किया। यह पहल देहरादून के बेटियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जहाँ शिक्षा की ‘स्पार्क’ को बुझने नहीं दिया जाएगा।

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